नवाचार और उद्यमशीलता को नया आयाम देंगे बौद्धिक संपदा अधिकार–प्रो.राणा प्रताप सिंह

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र (MMTTC) में आयोजित बौद्धिक संपदा अधिकार-नवाचार और उद्यमशीलता के प्रेरक विषयक एक सप्ताहीय संकाय विकास कार्यक्रम

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र (MMTTC) में आयोजित बौद्धिक संपदा अधिकार-नवाचार और उद्यमशीलता के प्रेरक विषयक एक सप्ताहीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) के समापन सत्र में आज बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) के सृजन व संरक्षण पर उच्च स्तरीय विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा के कुलपति प्रो.राणा प्रताप सिंह ने कहा कि नई तकनीकों और शोध सामग्री के विकास में उद्योग और अकादमिक जगत की साझेदारी समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक नवाचारों को बौद्धिक संपदा अधिकारों का कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा,तब तक मौलिकता और शोध को उनका वास्तविक सम्मान नहीं मिल पाएगा। प्रो.सिंह ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि कैसे एक मजबूत IPR ढांचा किसी भी देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत बनाता है। सरकार की पहले और i-STEM कार्यक्रम में वैज्ञानिक-एफ डॉ.विशाल चौधरी कार्यालय-प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार भारत सरकार नई दिल्ली ने सरकार की विभिन्न योजनाओं व पहलों-विशेषकर i-STEM कार्यक्रम के माध्यम से IPR और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो.श्रीप्रकाश सिंह कुलपति एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने की। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में IPR सेल्स स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल और कम लागत वाला बनाना होगा,तभी देश में अनुसंधान और नवाचार को गति मिल सकेगी। नवप्रवर्तकों के अधिकारों का संरक्षण अनिवार्य MMTTC के निदेशक डॉ.राहुल के. सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार नवप्रवर्तकों की सृजनशीलता और मौलिकता के सम्मान एवं संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि यह एफडीपी प्रतिभागियों के लिए IPR तथा इसके नवाचार और उद्यमशीलता में योगदान को समझने का एक उत्कृष्ट मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में सहायक निदेशक डॉ.सोमेश थपलियाल ने अतिथियों का स्वागत किया और सत्र का संचालन किया। तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ.सौरभ यादव ने बताया कि इस कार्यक्रम में देशभर से 30 संकाय सदस्यों ने भाग लिया। उन्हें सात राज्यों के प्रतिष्ठित संस्थानों के 22 विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों ने प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने अंत में धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।

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