हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल अपने कार्यों से नहीं,बल्कि अपने व्यवहार,संस्कार,विचार और संवेदनशीलता से समाज के मन में स्थायी स्थान बना लेते हैं। डॉ.प्रदीप अणथ्वाल ऐसे ही विशिष्ट व्यक्तित्व हैं,जिनकी पहचान एक कर्मनिष्ठ सेवक,सौम्य व्यवहार के धनी,सादगीपूर्ण जीवनशैली और समाज के प्रति समर्पित चेतना के रूप में स्थापित रही है। श्रीक्षेत्र श्रीनगर की सांस्कृतिक धर्मनगरी में सामाजिक,सांस्कृतिक एवं शैक्षिक गतिविधियों में सदैव अग्रणी भूमिका निभाने वाले डॉ.प्रदीप अणथ्वाल को उनके दीर्घकालीन,निष्ठावान एवं समर्पित सेवा जीवन के उपरांत सेवानिवृत्त होने पर हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् श्रीनगर द्वारा एक भव्य,गरिमामय एवं भावनात्मक विदाई समारोह आयोजित कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह अवकाश प्राप्त कर्मचारी संगठन के भवन में आयोजित किया गया,जिसकी अध्यक्षता हिमालयन साहित्य कला परिषद् के वरिष्ठ सदस्य कृष्णा नंद मैठाणी ने की। कार्यक्रम में शिक्षा,साहित्य,कला,रंगमंच,पत्रकार,समाजसेवी एवं धार्मिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की गरिमामयी उपस्थिति रही,जिसने समारोह को विशिष्ट गरिमा प्रदान की। समारोह में प्रमुख रूप से प्रो.आर.एन.गैरोला,प्रो.संपूर्ण सिंह रावत,प्रो.आर.पी.थपलियाल,प्रो.महेश नौड़ियाल,रोटेरियन नरेश नौटियाल,वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा,वीरेंद्र रतूड़ी बिट्टू,कटकेश्वर मंदिर के महंत महेश गिरि,हेमचंद ममगांई,डॉ.भरत चौहान,डॉ.प्रकाश चमोली,नगर निगम के पार्षद प्रवेश चमोली,कवि एवं चित्रकार जय कृष्ण पैन्यूली,आर.पी.कपरवाण,दिनेश उनियाल,वरिष्ठ पत्रकार डॉ.श्रीकृष्ण उनियाल,प्रसिद्ध रंगकर्मी मदन डंगवाल,मेनका मिश्रा,डॉ.सुशांत मिश्रा,धर्मेन्द्र चौकियाल सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अपने संबोधनों में डॉ.प्रदीप अणथ्वाल के व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल एक कर्मठ कार्यकर्ता ही नहीं,बल्कि मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण एक सच्चे समाजसेवी हैं। उनका मधुर व्यवहार,सौम्यता,सरलता,सद्व्यवहार,सहयोग भावना,कर्तव्यनिष्ठा एवं समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण उन्हें विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। श्रीनगर गढ़वाल की सांस्कृतिक धर्मनगरी में सामाजिक कार्यों,धार्मिक आयोजनों,सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा अन्य सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय सहभागिता समाज के लिए प्रेरणास्रोत रही है। परिषद् की ओर से डॉ.प्रदीप अणथ्वाल को उपहार,भेंट एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल उनके सेवाकाल का मूल्यांकन था,बल्कि उनके व्यक्तित्व,संस्कारों एवं सामाजिक योगदान का सार्वजनिक अभिनंदन भी था। इस अवसर पर डॉ.प्रदीप अणथ्वाल ने भावुक शब्दों में हिमालयन साहित्य एवं कला परिषद् श्रीनगर का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद् द्वारा प्रदत्त यह सम्मान उनके जीवन की अमूल्य स्मृति बनकर सदैव उनके साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि सेवा से निवृत्ति जीवन की सक्रियता का अंत नहीं,बल्कि समाजसेवा के नए अध्याय की शुरुआत है। कार्यक्रम का सफल,सुसंगठित एवं गरिमामय संचालन नीरज नैथानी द्वारा किया गया। समारोह सौहार्द,आत्मीयता,सम्मान एवं भावनात्मक जुड़ाव के वातावरण में सम्पन्न हुआ और उपस्थित सभी जनों के लिए यह कार्यक्रम एक प्रेरक,स्मरणीय एवं भावनात्मक अनुभव बन गया।