समलौण पौधारोपण से बेटियों की विदाई बनी यादगार-पर्यावरण संरक्षण का दिया सशक्त संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपराओं और प्रकृति प्रेम की अनूठी मिसाल इन दिनों जनपद पौड़ी गढ़वाल के ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। विवाह जैसे

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक परंपराओं और प्रकृति प्रेम की अनूठी मिसाल इन दिनों जनपद पौड़ी गढ़वाल के ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। विवाह जैसे पारिवारिक और भावनात्मक अवसरों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए समलौण पौधारोपण की प्रेरणादायी पहल लगातार जनचेतना का रूप ले रही है। हाल ही में जनपद के विभिन्न गांवों में बेटियों की शादी के अवसर पर वर-वधू और ग्रामीणों द्वारा समलौण पौधारोपण कर न केवल इस पावन अवसर को यादगार बनाया गया,बल्कि प्रकृति संरक्षण का मजबूत संदेश भी दिया गया। जनपद पौड़ी गढ़वाल के राठ क्षेत्र अंतर्गत विकास खण्ड पाबों की पट्टी बाली कण्डारस्यूं के ग्राम सैंजी में सुलोचना देवी,धर्मपत्नी स्व.देवेन्द्र सिंह साहू की पुत्री के विवाह अवसर पर एक सराहनीय पहल की गई। विवाह समारोह के दौरान वर-वधू धर्मसिंह एवं दुर्गा ने अपने घर के आंगन में संतरे का समलौण पौधा रोपकर विवाह को यादगार बनाने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का प्रेरक संदेश दिया। पौधे के संरक्षण की जिम्मेदारी दुल्हन की मां सुलोचना देवी ने स्वयं संकल्प लेकर स्वीकार की। इस कार्यक्रम का संचालन गांव की समलौण सेना नायिका गीता देवी पोखरियाल ने किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक भौतिकवादी दौर में मनुष्य की पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता कम होती जा रही है,जिसके परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन,ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए समाज को वृक्षारोपण को जनआंदोलन के रूप में अपनाना होगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि जीवन के प्रत्येक शुभ संस्कार की स्मृति में समलौण पौधारोपण अवश्य करें,ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण मिल सके। इस अवसर पर समलौण सेना की सदस्य सीमा देवी,आशा देवी,मंदोदरी देवी,रामी देवी,विधि देवी,लता देवी,आरती देवी,गुड्डी देवी,कमला देवी तथा कुमारी रुबी सहित अनेक ग्रामीण,घराती और बाराती उपस्थित रहे। पौधारोपण जैसे पुण्य कार्य से प्रभावित होकर दूल्हे ने समलौण सेना को प्रोत्साहन स्वरूप 500 रुपए की नगद राशि भेंट कर इस पहल की सराहना की। इसी प्रकार जनपद पौड़ी गढ़वाल के राठ क्षेत्र अंतर्गत विकास खण्ड थलीसैंण की पट्टी कण्डारस्यूँ के ग्राम स्योली तल्ली में भी बेटी की विदाई को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया गया। यहां घनानंद पंत एवं दिनेश्वरी देवी की पुत्री के विवाह अवसर पर वर-वधू संदीप एवं ज्योति ने घर के आंगन में मौसमी का समलौण पौधा रोपकर विवाह को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की अनूठी पहल की। पौधे के संरक्षण का संकल्प पंडित रामकृष्ण नौटियाल द्वारा दिलाया गया,जबकि दुल्हन की माता दिनेश्वरी देवी ने रक्षा सूत्र बांधकर पौधे की रक्षा का दायित्व ग्रहण किया। इस अवसर पर पंडित नौटियाल ने भावुक शब्दों में कहा कि आज बेटी अपने मायके से विदा हो रही है,लेकिन यह पौधा उसकी स्मृतियों को सदैव जीवित रखेगा। समय के साथ जब यह पौधा विकसित होकर वृक्ष बनेगा,तब यह पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन से जुड़े विवेक पोखरियाल ने किया। उन्होंने कहा कि समलौण पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठा और भावनात्मक प्रयास है,जिसमें जीवन के विभिन्न संस्कारों को वृक्षारोपण से जोड़कर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह पहल अब केवल एक गांव या क्षेत्र तक सीमित नहीं रही,बल्कि पूरे उत्तराखण्ड में एक सामाजिक परंपरा और जनआंदोलन के रूप में तेजी से फैल रही है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आह्वान किया कि जीवन के सोलह संस्कारों को समलौण पहल से जोड़ते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करें तथा जंगलों को आग से बचाने के लिए भी सामूहिक प्रयास करें,ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण सुरक्षित रखा जा सके। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य चैत सिंह रावत ने भी इस पहल की सराहना करते हुए आम जनमानस से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया। कार्यक्रम में भरत सिंह कंडारी,बृजमोहन कंडारी,केशवानंद जुयाल,कुशालमणि रतूड़ी,आनंदमणि पंत,प्रदीप जोशी,बबिन चमोली,दीपा रतूड़ी,गोदावरी देवी सहित अनेक ग्रामीण,घराती और बाराती उपस्थित रहे। ग्रामीणों का कहना है कि समलौण जैसी पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूत बना रही है,बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी नई दिशा दे रही है। बेटियों की विदाई जैसे भावनात्मक अवसरों को वृक्षारोपण से जोड़कर प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का जो संदेश दिया जा रहा है,वह निश्चित रूप से समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।

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