
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि श्रीनगर में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और एक स्वस्थ,सुरक्षित भविष्य की दिशा में अग्रसर करने हेतु एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। नशा मुक्त देवभूमि अभियान के अंतर्गत राजकीय पॉलिटेक्निक श्रीनगर में पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा व्यापक स्तर पर रैंडम ड्रग सैंपलिंग एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत दिनांक 19 मार्च 2026 को क्षेत्राधिकारी श्रीनगर अनुज कुमार के पर्यवेक्षण एवं प्रभारी निरीक्षक श्रीनगर कुलदीप सिंह के नेतृत्व में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की विशेषज्ञ टीम द्वारा पूर्ण गोपनीयता एवं वैज्ञानिक पद्धति के साथ लगभग 79 छात्र-छात्राओं की उनकी सहमति से रैंडम ड्रग सैंपलिंग की गई। यह पहल केवल जांच तक सीमित नहीं रही,बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में नशे के प्रति जागरूकता,आत्मनियंत्रण और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान मनोचिकित्सक डॉ.आशीष गुसाई ने छात्रों से संवाद करते हुए बताया कि नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा,साथियों के दबाव (Peer Pressure) या मानसिक तनाव से बचने के प्रयास में होती है,जो धीरे-धीरे गंभीर लत में बदल जाती है। उन्होंने विस्तार से बताया कि नशा मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर व्यक्ति की निर्णय क्षमता को कमजोर करता है। इसके शुरुआती संकेतों में पढ़ाई में रुचि कम होना,व्यवहार में बदलाव और आत्मविश्वास में गिरावट शामिल हैं। लंबे समय तक नशे का सेवन अवसाद,आक्रामकता एवं अन्य मानसिक विकारों को जन्म देता है और व्यक्ति के पारिवारिक,सामाजिक एवं आर्थिक जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित करता है। छात्रों को यह भी समझाया गया कि नशे से बचाव के लिए ना कहने की क्षमता विकसित करना,गलत संगति से दूर रहना और सकारात्मक मित्रों का चयन करना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही खेल,योग,ध्यान,संगीत जैसी रचनात्मक गतिविधियों को अपनाकर मानसिक तनाव को दूर किया जा सकता है। किसी भी प्रकार की समस्या या तनाव की स्थिति में नशे का सहारा लेने के बजाय परिवार,शिक्षकों या विशेषज्ञों से संवाद करना चाहिए। कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से नशे के अवैध नेटवर्क तेजी से फैल रहे हैं। ऐसे में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या संपर्क के प्रति सतर्क रहते हुए तुरंत पुलिस को सूचना देना आवश्यक है। इस जागरूकता कार्यक्रम में पुलिस विभाग की ओर से वरिष्ठ उपनिरीक्षक जगमोहन रमोला एवं सीआईयू टीम श्रीनगर की सक्रिय भागीदारी रही,जबकि चिकित्सा विभाग की टीम में डॉ.आशीष गुसाईं (मनोचिकित्सक एवं जिला नोडल अधिकारी),लैब टेक्नीशियन शिवदयाल सिंह भंडारी एवं नवीन कठैत शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। यह पहल न केवल जागरूकता का संदेश देने में सफल रही,बल्कि युवाओं को नशा मुक्त भविष्य की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त प्रयास भी साबित होगा।