साइबर सुरक्षा शिक्षा में भारत की गूंज वैश्विक मंच तक-शिक्षक डॉ.अतुल बमराड़ा के शोध को अंतरराष्ट्रीय पहचान

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी गढ़वाल। पर्वतीय क्षेत्र के एक सरकारी विद्यालय से उठी ज्ञान की यह लौ अब वैश्विक मंच पर अपनी चमक बिखेर रही है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौंरखाल के शिक्षक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी गढ़वाल। पर्वतीय क्षेत्र के एक सरकारी विद्यालय से उठी ज्ञान की यह लौ अब वैश्विक मंच पर अपनी चमक बिखेर रही है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौंरखाल के शिक्षक डॉ.अतुल बमराडा और उनके सहयोगी शोधकर्ताओं पार्था रॉय,डॉ.विश्वनाथ गारगोटे तथा खांडू थुंगोन द्वारा संयुक्त रूप से लिखित शोधपत्र इन्हेंसिंग साइबर हाइजीन अंमग कम्युनिटीज एक्सपीरिएंशियल साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम्स को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ साइबर सिक्योरिटी एजुकेशन,रिसर्च एंड प्रैक्टिस में प्रकाशित किया गया है। समुदायों में साइबर स्वच्छता को अनुभवात्मक साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सुदृढ़ करना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। यह शोधपत्र साइबर सुरक्षा शिक्षा,अनुसंधान एवं व्यवहार अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित हुआ है,जिसे किनेसॉ स्टेट विश्वविद्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रकाशित किया जाता है। साइबर सुरक्षा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में इस पत्रिका की वैश्विक प्रतिष्ठा है,ऐसे में इस शोध का प्रकाशन भारतीय अकादमिक जगत के लिए गर्व का विषय बन गया है। इस शोध में समुदाय स्तर पर साइबर स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए अनुभवात्मक (व्यावहारिक अनुभव आधारित) शिक्षण पद्धति पर आधारित साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का गहन विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया कि जब लोगों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों और सहभागिता के माध्यम से जोड़ा जाता है, तो उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव तेजी से आता है और साइबर खतरों के प्रति उनकी सजगता बढ़ती है। डॉ.अतुल बमराडा ने बताया कि यह शोध केवल शैक्षणिक अध्ययन तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक साइबर सुरक्षा की समझ को पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में साइबर जागरूकता उतनी ही आवश्यक है जितनी सामान्य शिक्षा और इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्य करना बेहद जरूरी है। इस शोध को सफलतापूर्वक पूर्ण करने में छबी सेवा फाउंडेशन तथा Mon Indigenous Culture and Welfare Society का महत्वपूर्ण तकनीकी एवं संसाधनात्मक सहयोग रहा। वहीं डॉ.एल.पी.शर्मा उप निदेशक राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) एवं प्रख्यात प्रौद्योगिकीविद् ने इस उपलब्धि को भारत के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह शोध साइबर सुरक्षा शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के प्रयास भविष्य में डिजिटल भारत को और अधिक सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। पहाड़ की धरती से निकली यह शोध उपलब्धि आज वैश्विक मंच पर भारत की बौद्धिक क्षमता का परचम लहरा रही है-यह न केवल एक शिक्षक की सफलता है,बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश के लिए गर्व का विषय है।

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