देवभूमि में अनूठी पहल-पंचतत्व आश्रम किष्किंधा में वास्तु पुरुष मंदिर की प्रतिष्ठा,आध्यात्म और ऊर्जा का दिव्य संगम

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन वादियों में आध्यात्मिक इतिहास का एक नया अध्याय जुड़ गया,जब जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड खिर्सू अंतर्गत बलोड़ी स्थित पंचतत्व आश्रम किष्किंधा

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन वादियों में आध्यात्मिक इतिहास का एक नया अध्याय जुड़ गया,जब जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकास खण्ड खिर्सू अंतर्गत बलोड़ी स्थित पंचतत्व आश्रम किष्किंधा में वास्तु पुरुष मंदिर की भव्य और विधिवत प्रतिष्ठा संपन्न हुई। माना जा रहा है कि देवभूमि में इस स्वरूप का यह संभवतः पहला मंदिर है,जिसने इस आयोजन को और अधिक विशिष्ट,ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया। वैदिक मंत्रोच्चार,यज्ञ-हवन और दिव्य अनुष्ठानों के मध्य सम्पन्न इस कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। वातावरण में गूंजते मंत्रों और श्रद्धालुओं की आस्था ने आश्रम परिसर को मानो एक दिव्य लोक में परिवर्तित कर दिया,जहां हर व्यक्ति आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर रहा था। मंदिर की स्थापना प्रख्यात विद्वान एवं आध्यात्मिक चिंतक डॉ.मनोज कुमार जुयाल के करकमलों द्वारा संपन्न हुई। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने कहा कि वास्तु पुरुष सृष्टि के मूल ऊर्जा केंद्र के प्रतीक हैं,जो किसी भी स्थान के संतुलन,समृद्धि और शांति के आधार स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने इस पहल को केवल धार्मिक नहीं,बल्कि वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का संगम बताते हुए कहा कि यह मंदिर भविष्य में लोगों को सकारात्मक जीवन शैली और संतुलित ऊर्जा की दिशा में मार्गदर्शन देगा। कार्यक्रम में आचार्य अमलानंद जुयाल आदर्श संस्कृत विद्यालय के ऋषि कुमारों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को वैदिक परंपरा की जीवंत अनुभूति से भर दिया। ऋषि कुमारों द्वारा उच्चारित वैदिक ऋचाएं,यज्ञ की पवित्र अग्नि और अनुशासित साधना ने उपस्थित जनसमूह को गहन आध्यात्मिक अनुभूति से अभिभूत कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्राचीन गुरुकुल परंपरा सजीव होकर वर्तमान में अवतरित हो गई हो। पंचतत्व आश्रम के प्रबंधक पारस चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि यह आश्रम केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं,बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों,संस्कारों और आध्यात्मिक जागरण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि वास्तु पुरुष मंदिर की स्थापना से यह धाम साधना,ध्यान,अध्ययन और आंतरिक शांति की खोज करने वाले साधकों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। इस ऐतिहासिक आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया,बल्कि सामाजिक समरसता,सांस्कृतिक एकता और सनातन परंपरा के संरक्षण का भी सशक्त संदेश दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं,बुद्धिजीवियों और गणमान्य नागरिकों ने इसे जन-आस्था के महापर्व के रूप में अनुभव किया। देवभूमि उत्तराखंड में वास्तु पुरुष मंदिर की यह स्थापना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यहां की धरती आज भी सनातन संस्कृति,वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना की अमर ज्योति को प्रज्वलित किए हुए है-जो आने वाली पीढ़ियों को भी मार्गदर्शन और प्रेरणा देती रहेगी।

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