हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
जोशीमठ/श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय की गोद में बसे विश्वप्रसिद्ध हिमक्रीड़ा स्थल औली और मनमोहक बुग्यालों से आज पर्यावरण संरक्षण और गंगा स्वच्छता का एक सशक्त संदेश पूरे देश में प्रसारित हुआ। दिनांक 28 मार्च 2026 को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय जोशीमठ जनपद चमोली की नमामि गंगे इकाई द्वारा गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत एक व्यापक जन-जागरूकता रैली और स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया,जिसने स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय परिसर से हुई जहां प्राचार्य प्रोफेसर प्रीति कुमारी ने छात्र-छात्राओं को गंगा स्वच्छता शपथ दिलाते हुए गंगा नदी के आध्यात्मिक,सांस्कृतिक और जीवनदायिनी महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं,बल्कि भारतीय सभ्यता की आत्मा है,जिसकी स्वच्छता और संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके प्रेरक उद्बोधन के बाद रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसके पश्चात छात्र-छात्राओं का उत्साही दल स्वच्छ गंगा-स्वस्थ भारत के नारों के साथ ज्ञान गंगा धारा जोशीमठ पहुंचा,जहां स्वच्छता अभियान चलाते हुए लगभग 10 किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर नगर पालिका के कूड़ेदान में निस्तारित किया गया। अभियान का अगला पड़ाव रहा अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग डेस्टिनेशन औली,जहां बर्फ से ढके प्राकृतिक सौंदर्य के बीच छात्रों ने हनुमान मंदिर प्रांगण से स्वच्छता अभियान की शुरुआत की। यह अभियान औली के प्रमुख स्कीइंग क्षेत्र से होते हुए आर्टिफिशियल लेक के आसपास तक चला,जहां पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए करीब 50 से 55 किलो प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया गया। इस प्रकार दुर्गम और संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में स्वच्छता के प्रति युवाओं की प्रतिबद्धता साफ झलकती नजर आई। इस अवसर पर नमामि गंगे इकाई ने देशवासियों से अपील की कि वे गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करें और प्लास्टिक प्रदूषण से बचें। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ.रणजीत सिंह मार्तोलिया,डॉ.राजेंद्र सिंह राणा,डॉ.किशोरी रवान्टा,शिव सिंह सहित अन्य शिक्षकों की सक्रिय उपस्थिति रही। वहीं नमामि गंगे के नोडल अधिकारी धीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में यह अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। औली के बर्फीले विस्तार से उठा यह स्वच्छता का संकल्प न केवल गंगा संरक्षण की दिशा में एक मजबूत पहल है,बल्कि यह संदेश भी देता है कि जब युवा जागरूक होते हैं,तो परिवर्तन निश्चित होता है।