
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि श्रीनगर एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत मंच बनकर उभरा,जब केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से आयोजित लोकरंग उत्सव ने यहां के माहौल को रंग,रस और परंपराओं से सराबोर कर दिया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र,पटियाला के सौजन्य तथा नगर निगम और पराज इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के सहयोग से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने संस्कृति प्रेमियों को एक यादगार अनुभव दिया। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीकोट के सभागार में आयोजित इस उत्सव में गुजरात,राजस्थान,उत्तर प्रदेश,कश्मीर,हरियाणा और उत्तराखंड के कलाकारों ने अपनी-अपनी लोकसंस्कृति की रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक वेशभूषा,लोकगीतों की मधुर धुन और लोकनृत्यों की लयबद्ध थाप ने पूरे सभागार को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ.विनिता रावत द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने इस तरह के आयोजनों को सांस्कृतिक समन्वय का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है,और ऐसे आयोजन हमें एक-दूसरे की संस्कृति को समझने और सम्मान देने का अवसर प्रदान करते हैं। लोकरंग उत्सव के दौरान मंच पर प्रस्तुत प्रत्येक कार्यक्रम ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कहीं राजस्थान की घूमर की छटा बिखरी तो कहीं गुजरात के गरबा की ऊर्जा ने माहौल को जीवंत बना दिया। कश्मीर की लोकधुनों की शालीनता,हरियाणा की झूमती ताल और उत्तराखंड की लोक परंपराओं की आत्मीयता ने दर्शकों को देश की सांस्कृतिक यात्रा पर ले जाने का कार्य किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की लोक परंपराओं,सांस्कृतिक विरासत और जीवन शैली से लोगों को परिचित कराना रहा,जिसमें आयोजक पूरी तरह सफल नजर आए। बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों-विशेषकर युवाओं और छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया और कलाकारों की प्रस्तुति को जोरदार तालियों से सराहा। इस आयोजन ने न केवल श्रीनगर की सांस्कृतिक धड़कन को और तेज किया,बल्कि यह भी साबित किया कि ऐसे मंच देश की एकता में विविधता की भावना को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोकरंग उत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया-संस्कृति ही वह सेतु है,जो देश के कोने-कोने को जोड़कर एक भारत,श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार करता है।