अहिंसा परमो धर्म की गूंज से गुंजायमान हुआ श्रीनगर-प्रभात फेरी से शुरू हुआ उत्सव,भव्य शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन नगरी श्रीनगर आज अहिंसा परमो धर्म के दिव्य संदेश से अनुप्राणित हो उठी,जब जैन समुदाय द्वारा भगवान महावीर जयंती अत्यंत श्रद्धा,उल्लास और भव्यता

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन नगरी श्रीनगर आज अहिंसा परमो धर्म के दिव्य संदेश से अनुप्राणित हो उठी,जब जैन समुदाय द्वारा भगवान महावीर जयंती अत्यंत श्रद्धा,उल्लास और भव्यता के साथ मनाई गई। पूरे नगर में दिनभर भक्ति,अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण बना रहा। इस पावन अवसर की शुरुआत प्रात-5.30 बजे भव्य प्रभात फेरी के साथ हुई,जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से प्रभु के गुणगान करते हुए नगर को आध्यात्मिक चेतना से जागृत किया। प्रभात फेरी के साथ ही महावीर जयंती उत्सव का शुभारंभ हुआ,जिसने पूरे आयोजन को एक दिव्य स्वर प्रदान किया। इसके उपरांत जैन मंदिर से प्रारंभ हुई भव्य शोभायात्रा में भगवान महावीर की सुसज्जित प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रही। शोभायात्रा जैन मंदिर से निकलकर अप्पर बाजार,गणेश बाजार,वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मार्ग,आढ़त बाजार,काला रोड एवं ऐतिहासिक गोला बाजार होते हुए पुनः जैन मंदिर पहुंची। नगर की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब श्रद्धा और उत्साह का अनुपम दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। महिलाएं,पुरुष,युवा एवं बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर भक्ति,अनुशासन और संस्कृति का जीवंत उदाहरण बनते नजर आए। अहिंसा परमो धर्म एवं जीव दया के गगनभेदी उद्घोषों से पूरा श्रीनगर गुंजायमान हो उठा। इस पावन अवसर पर संजय कुमार जैन,डॉ.राकेश जैन,मनोज कुमार जैन,नवनीत जैन,श्रवण कुमार जैन,अरुण जैन,पंकज जैन,पुनीत जैन,विकास जैन,शुभम जैन,अक्षत जैन,विवेक जैन,लखपत सिंह भण्डारी,राजीव विश्नोई,प्रवीण अग्रवाल,श्रीनगर व्यापार सभा अध्यक्ष दिनेश असवाल,उम्मेद सिंह मेहरा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। मातृशक्ति में शकुंतला जैन,ममता जैन,रशिका जैन,अपूर्वा जैन,अनू जैन,चंचल जैन सहित बड़ी संख्या में महिलाएं,युवा वर्ग एवं छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हुए। कार्यक्रम का सफल आयोजन जैन समुदाय द्वारा सामूहिक सहयोग,समर्पण और अनुशासन के साथ किया गया,जो समाज की एकजुटता का प्रेरणादायक उदाहरण बना। आज भी उतना ही प्रासंगिक भगवान महावीर के जीवन और उपदेश केवल धार्मिक नहीं,बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए जीवन जीने की सर्वोत्तम दिशा प्रदान करते हैं। अहिंसा-मन,वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाना ही सर्वोच्च धर्म सत्य-सत्य का पालन आत्मा की शुद्धि और मोक्ष का मार्ग अपरिग्रह-सीमित आवश्यकताएं,लोभ और मोह से मुक्ति,समता और करुणा: हर जीव के प्रति समान भाव और दया ही सच्ची मानवता,आज जब समाज विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है,महावीर का यह संदेश शांति,सहिष्णुता और आपसी सद्भाव की दिशा में एक प्रकाश स्तंभ की तरह मार्गदर्शन करता है। आस्था के साथ सामाजिक एकता का सशक्त संदेश श्रीनगर में आयोजित यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना,बल्कि सामाजिक एकता,भाईचारे और सांस्कृतिक जागरूकता का सशक्त संदेश भी देता नजर आया। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करते हैं। अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है-यही महावीर का मार्ग,यही मानवता का सार।

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