गढ़वाल विश्वविद्यालय में क्षमता निर्माण की पाठशाला-विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास से प्रतियोगी परीक्षाओं तक मिला विशेषज्ञ मार्गदर्शन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र द्वारा विद्यार्थियों के क्षमता निर्माण,व्यक्तित्व विकास,आत्मविश्वास,नेतृत्व क्षमता तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र द्वारा विद्यार्थियों के क्षमता निर्माण,व्यक्तित्व विकास,आत्मविश्वास,नेतृत्व क्षमता तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास,प्रभावी संवाद,सकारात्मक सोच,निर्णय लेने की क्षमता,समय प्रबंधन,नेतृत्व कौशल,छात्रवृत्तियों तथा उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह तथा मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र के समन्वयक प्रो.एम.एम.सेमवाल के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने अतिथियों,प्राध्यापकों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों एवं वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल शैक्षणिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के साथ संवाद करने,निर्णय लेने,नेतृत्व करने,समस्याओं का समाधान खोजने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने की क्षमता भी विकसित करनी होगी। मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर एवं अनुशासित प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान अर्जित करना नहीं है,बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व,अनुशासन,नेतृत्व क्षमता,सकारात्मक सोच एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करना भी है। कुलपति ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय में उपलब्ध पुस्तकालय,अध्ययन सामग्री तथा अन्य शैक्षणिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नियमित अध्ययन,समय का उचित प्रबंधन,निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ विद्यार्थी अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। रोहित सिंह दुबरिया जिला समाज कल्याण अधिकारी पौड़ी ने समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तथा उपलब्ध शैक्षणिक एवं आर्थिक सहायता के माध्यम से अपने भविष्य को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अधिकारों,छात्रवृत्ति योजनाओं एवं सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए,ताकि किसी भी अवसर से वे वंचित न रहें। कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण विशेषज्ञों की विशेष परिचर्चा रही। परिचर्चा के दौरान विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास,प्रभावी संवाद,व्यवहारिक कौशल,सोच एवं लक्ष्य निर्धारण,छात्रवृत्तियों तथा लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। दून विश्वविद्यालय के प्रो.हर्ष पति डोभाल ने प्रभावी संवाद एवं संचार कौशल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए अपनी बात को स्पष्ट एवं प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता आवश्यक है। उन्होंने सक्रिय श्रवण,आत्मविश्वास तथा स्पष्ट अभिव्यक्ति को प्रभावी संवाद का महत्वपूर्ण आधार बताया। प्रो.डी.एस.नेगी ने न्यूरो प्रोग्रामिंग के माध्यम से सोच,व्यवहार एवं लक्ष्य निर्धारण के बीच संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच विकसित करने तथा अपनी मानसिक क्षमता का रचनात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। प्रो.महेंद्र बाबू ने व्यवहारिक कौशल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नेतृत्व क्षमता,सामूहिक कार्य,समय प्रबंधन,समस्या समाधान एवं निर्णय लेने की क्षमता को विद्यार्थियों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यवहारिक दक्षता भी सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डॉ.अरविंद रावत ने विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्तियों एवं उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से उपलब्ध योजनाओं एवं अवसरों की जानकारी प्राप्त करने और पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाने का आह्वान किया। डॉ.प्रकाश कुमार सिंह ने लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए नियमित अध्ययन,पाठ्यक्रम की समझ,समय प्रबंधन,निरंतर अभ्यास तथा समसामयिक विषयों की जानकारी को आवश्यक बताया। परिचर्चा के दौरान विद्यार्थियों ने व्यक्तित्व विकास,प्रभावी संवाद,लक्ष्य निर्धारण,प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी,छात्रवृत्ति,उच्च शिक्षा एवं भविष्य के अवसरों से संबंधित अनेक प्रश्न विशेषज्ञों के समक्ष रखे। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें व्यावहारिक एवं उपयोगी सुझाव दिए। इस दौरान विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। गतिविधि आधारित एवं संवादात्मक सत्रों ने कार्यशाला को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाया। डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र के समन्वयक प्रो.एम.एम.सेमवाल ने कहा कि क्षमता निर्माण केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं है,बल्कि यह आत्मविश्वास,नेतृत्व,निर्णय लेने की क्षमता,संवाद कौशल एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की निरंतर प्रक्रिया है। शैक्षणिक,मार्गदर्शन एवं व्यक्तित्व विकास संबंधी अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने तथा अपने निर्धारित लक्ष्यों के प्रति अनुशासित एवं समर्पित रहने का आह्वान किया। कार्यशाला के दौरान डॉ.आशीष बहुगुणा ने विभिन्न गतिविधियों का संचालन एवं समन्वय किया। उन्होंने गतिविधि आधारित एवं संवादात्मक सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की। उनकी प्रभावी भूमिका से कार्यशाला को व्यवस्थित,रोचक एवं सहभागितापूर्ण स्वरूप मिला। बिरला परिसर के निदेशक प्रो.हरिभजन सिंह चौहान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास एवं क्षमता निर्माण के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों को उपयोगी बताया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ प्राध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो.महेंद्र बाबू,प्रो.एम.एस.नेगी,डॉ.जसपाल सिंह चौहान,डॉ.श्वेता वर्मा,डॉ.वरुण बर्थवाल,डॉ.सुरेन्द्र मीणा,डॉ.विनीत मौर्य,डॉ.राम साहू सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक उपस्थित रहे। दून विश्वविद्यालय के डॉ.मानवेन्द्र बर्थवाल ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन डॉ.आशीष बहुगुणा ने प्रभावशाली एवं व्यवस्थित ढंग से किया। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न गतिविधियों को क्रमबद्ध रूप से संचालित करते हुए अतिथियों,विशेषज्ञों,प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ.प्रकाश कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यशाला को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन,अतिथियों,विशेषज्ञों,प्राध्यापकों,आयोजकों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल एवं सुव्यवस्थित रूप प्रदान करने में डॉ.अरविंद रावत,डॉ.वीर सिंह,डॉ.शैलेंद्र चमोला,डॉ.मुकेश सहाय,गौरव पडियार एवं गौरव वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यशाला ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास,नेतृत्व क्षमता,प्रभावी संवाद,सकारात्मक सोच और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के विभिन्न पहलुओं को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। विश्वविद्यालय के डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र की यह पहल विद्यार्थियों को उनके शैक्षणिक एवं व्यावसायिक लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करने वाली रही।

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