भटोली के गढ़खालेश्वर धाम में आस्था का महासंगम-गुरु गोरखनाथ जन्मोत्सव पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। वैशाख मास की पावन बेला में गढ़वाल की धार्मिक आस्था एक बार फिर चरम पर दिखाई दी,जब गढ़खालेश्वर धाम भटोली स्थित जय शिव गोरखनाथ गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। वैशाख मास की पावन बेला में गढ़वाल की धार्मिक आस्था एक बार फिर चरम पर दिखाई दी,जब गढ़खालेश्वर धाम भटोली स्थित जय शिव गोरखनाथ गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर में गुरु गोरखनाथ जन्मोत्सव बड़े श्रद्धा,उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी यह आयोजन क्षेत्र की आस्था और विश्वास का केंद्र बनकर उभरा,जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालुओं ने भागीदारी निभाई। दिनांक 1 मई को बैसाख मास की चतुर्दशी के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक पर्व की तैयारियां पूर्व से ही भजन-कीर्तन,पूजा-पाठ और अखंड धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शुरू हो गई थीं। मंदिर परिसर में दिन-रात गूंजते भक्ति गीतों ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया। इस दौरान जिया मौला देई,दुधि गुरु भगवान एवं भगवान नृसिंह के जन्मोत्सव की भी श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। मुख्य दिवस पर हवन-पूजन के पश्चात गुरु गोरखनाथ को श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विधिवत झंडा चढ़ाया गया। यह परंपरा यहां की विशेष पहचान बन चुकी है,जिसमें भक्तजन अपनी आस्था के प्रतीक स्वरूप झंडे पर कपड़ा बांधकर मनोकामनाएं मांगते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें यहां अवश्य पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से निःसंतान दंपतियों के लिए यह स्थान आस्था का केंद्र बनता जा रहा है,जहां कई श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की अनुभूति साझा की है। मंदिर के महंत एवं गुरु गोरखनाथ के उपासक नरेश कुमार भारती के नेतृत्व में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया,जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजन में सेवा,सहयोग और अनुशासन की मिसाल देखने को मिली। पूजा-अर्चना का कार्य आनंद सिंह भंडारी एवं पंडित राजेश काला द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया,जिससे पूरे आयोजन में धार्मिक मर्यादा और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा गया। इस अवसर पर खिर्सू ब्लॉक प्रमुख अनिल भंडारी सहित महिपाल विष्ट,गोपाल घिल्डियाल,गौरव भंडारी,अरविंद सिंह,भीम सिंह,दर्शन लाल,विकास गोदियाल,ढोडियाल समेत अनेक गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। समूचा आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना,बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक एकता,सामाजिक समरसता और परंपराओं के संरक्षण का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया। यहां उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब यह दर्शाता है कि गढ़वाल की आस्था आज भी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई है।

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