
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। संत निरंकारी मिशन श्रीनगर ब्रांच में शनिवार 15 अगस्त को मुक्ति पर्व समागम श्रद्धा,भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच आयोजित किया गया। समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर सत्संग का श्रवण किया। पूरे वातावरण में भक्ति,प्रेम,सेवा,समर्पण और मानवता की भावना दिखाई दी। श्रद्धालु भक्तों ने उन महान संत विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए,जिनके त्याग एवं समर्पण ने मानवता को मुक्ति और कल्याण के मार्ग की ओर अग्रसर किया। समागम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मुक्ति पर्व केवल किसी विशेष अवसर का स्मरण करने का दिन नहीं,बल्कि उन महापुरुषों के त्याग,तपस्या,सेवा और समर्पण को अपने जीवन में उतारने का अवसर है,जिन्होंने मानवता के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक-दूसरे के प्रति प्रेम,विनम्रता,सद्भाव और भाईचारे की भावना मजबूत करने का संदेश दिया गया। समागम में मुक्ति पर्व के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि मुक्ति पर्व का आरंभ वर्ष 1964 में जगत माता बुद्धवती की पावन स्मृति में हुए पाठन-स्मृति कार्यक्रम से हुआ। वर्ष 1969 में शहनशाह बाबा अवतार सिंह के ब्रह्मलीन होने के उपरांत इस दिवस को शहनशाह-जगत माता दिवस के रूप में श्रद्धापूर्वक आयोजित किया जाने लगा। इसके बाद वर्ष 1979 में संत निरंकारी मंडल के प्रथम प्रधान संत लाभ सिंह की स्मृति को भी इस दिवस से जोड़ते हुए बाबा गुरबचन सिंह जी ने इसे मुक्ति पर्व के रूप में स्थापित किया। इस अवसर पर निरंकारी राजमाता के अतुलनीय जीवन तथा उनके द्वारा दी गई अनमोल शिक्षाओं का भी स्मरण किया जाता है। वर्ष 2018 से युगनिर्माता माता सविंदर जी को भी इस पावन अवसर पर श्रद्धापूर्वक नमन किया जाता है। उनके चारित्रिक जीवन,विनम्रता,त्याग,समर्पण और निष्काम सेवा से श्रद्धालुओं को प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया। समागम में कहा गया कि महापुरुषों का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके त्याग,सेवा,प्रेम और समर्पण को याद करना तभी सार्थक है,जब उनके आदर्शों को अपने व्यवहार और जीवन में उतारा जाए। समागम को संबोधित करते हुए महात्मा जगदीश सिंह जेठूड़ी ने कहा कि मानव जीवन की सार्थकता तभी है,जब उसके भीतर दूसरे के दुख-दर्द को समझने और जरूरतमंद की सहायता करने की भावना पैदा हो। निरंकार परमात्मा का ज्ञान हमें यह सिखाता है कि मानव-मानव में कोई भेद नहीं है। जब हम प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा की ज्योति का दर्शन करने लगते हैं तो जाति,धर्म,ऊंच-नीच और भेदभाव की दीवारें स्वतः समाप्त होने लगती हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम,सेवा और विनम्रता को जीवन का आधार बनाकर ही समाज में वास्तविक शांति स्थापित की जा सकती है। प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा व्यवहार करना चाहिए जिससे उसके कारण किसी को दुख न पहुंचे और जहां भी वह रहे,वहां प्रेम एवं भाईचारे का वातावरण बने। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि महापुरुषों के संदेश को केवल सुनने तक सीमित न रखें,बल्कि उसे अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में उतारें। सत्संग में वक्ताओं ने कहा कि महापुरुषों ने अपने जीवन में मानवता,प्रेम,सेवा और समर्पण को सर्वोच्च स्थान दिया। उनका जीवन समाज को यह प्रेरणा देता है कि मनुष्य अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लिए भी जीना सीखे। आज के दौर में जब समाज विभिन्न चुनौतियों से गुजर रहा है,ऐसे समय में आध्यात्मिक चेतना और मानवीय मूल्यों की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। प्रेम और भाईचारे से ही समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार किया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि निरंकार परमात्मा के ज्ञान के साथ जब मानव सेवा की भावना जुड़ती है तो व्यक्ति का जीवन सार्थक बनता है। सेवा,सुमिरन और सत्संग मनुष्य को भीतर से मजबूत करते हैं तथा उसे समाज के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराते हैं। समागम के दौरान प्रस्तुत भक्ति गीतों और आध्यात्मिक विचारों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। सत्संग के संदेशों के बीच श्रद्धालुओं ने आत्मचिंतन किया तथा मानवता,प्रेम,सद्भाव और परोपकार के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। महिलाओं,पुरुषों,युवाओं एवं सेवादल के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में भाग लिया। संत निरंकारी मिशन श्रीनगर ब्रांच के मीडिया प्रभारी गम्मा सिंह ने बताया कि 15 अगस्त को मुक्ति पर्व के रूप में विशेष सत्संग एवं कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि संत निरंकारी मिशन निरंकार परमात्मा के ज्ञान के साथ मानवता,प्रेम,एकता और भाईचारे की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मिशन का उद्देश्य मनुष्य को मनुष्य से जोड़ना तथा समाज में शांति,सद्भाव,परस्पर सम्मान और मानवता की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर महात्मा जगदीश सिंह जेठूड़ी,डॉ.के.पी.नौटियाल,शकुंतला पांडे,राजेंद्र सकलानी,रूपा रावत,सेवादल से अंजू देवी,उर्मिला देवी,रजनी भंडारी,नीलम सिरकोटी,भक्त निरंकारी सहित संत निरंकारी मिशन श्रीनगर ब्रांच के अनेक सेवादल सदस्य एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। समागम के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने महापुरुषों के त्याग एवं शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा मानवता की सेवा,प्रेम,सद्भाव और भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। मुक्ति पर्व समागम ने श्रीनगर क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक एकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का प्रभावशाली संदेश दिया।