रतोडा बैंड़ पर भागीरथी कला संगम का श्रमदान-झाड़ियां हटाकर स्वच्छता संग सुरक्षित बनाया खिर्सू-बुघाणी मार्ग

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। समाज के प्रति जिम्मेदारी,पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए भागीरथी कला संगम सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था श्रीनगर की ओर से रविवार 16

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। समाज के प्रति जिम्मेदारी,पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए भागीरथी कला संगम सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था श्रीनगर की ओर से रविवार 16 अगस्त को खिर्सू-बुघाणी मार्ग स्थित रतोड़ा बैंड पर व्यापक स्वच्छता एवं श्रमदान अभियान चलाया गया। संस्था के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने स्वयं श्रमदान करते हुए सड़क के मोड़ पर उगी घनी झाड़ियों,घास तथा चीड़ की गिरी पत्तियों और अन्य कचरे को हटाकर मार्ग को साफ-सुथरा एवं सुरक्षित बनाने का सराहनीय कार्य किया। रतोड़ा बैंड के समीप सड़क के किनारे काफी घनी झाड़ियां उग आई थीं,जिसके कारण मोड़ पर यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी परेशानी बनी हुई थी। झाड़ियों के कारण जंगली जानवरों के छिपे होने का भय भी बना रहता था। संस्था के सदस्यों ने कड़ी मेहनत कर इन झाड़ियों को काटकर हटाया तथा सड़क के किनारे जमा घास-पत्तियों की सफाई की। विशेष रूप से सड़क पर जगह-जगह बिखरी चीड़ की सूखी पत्तियां दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का कारण बन सकती थीं। ऐसे स्थानों पर पत्तियों की मोटी परत होने से वाहन के फिसलने का खतरा बना रहता है। संस्था के सदस्यों ने पूरे मोड़ और आसपास के क्षेत्र में गहन सफाई कर सड़क को काफी हद तक सुरक्षित और व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया। स्वच्छता अभियान के दौरान भागीरथी कला संगम के सदस्यों का जज्बा और उत्साह देखते ही बन रहा था। किसी ने झाड़ियां काटीं तो किसी ने सड़क से पत्तियां और कूड़ा हटाया। बिना किसी स्वार्थ के सामूहिक श्रमदान करते हुए सदस्यों ने यह संदेश दिया कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के क्षेत्र की जिम्मेदारी स्वयं उठाए तो स्वच्छ,सुंदर और सुरक्षित वातावरण का निर्माण किया जा सकता है। संस्था का मुख्य उद्देश्य केवल सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित न रहकर समाज में जागरूकता,सेवा,स्वच्छता,पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। संस्था द्वारा समय-समय पर किए जा रहे ऐसे सामाजिक कार्य निश्चित रूप से अन्य लोगों को भी अपने आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता एवं जनसेवा के लिए प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर भागीरथी कला संगम के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल ने अभियान में उपस्थित सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाजहित में किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास अपने आप में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हम अक्सर देश के विकास में अपने योगदान को बड़े कार्यों से जोड़कर देखते हैं,जबकि वास्तव में समाज और राष्ट्र की प्रगति छोटे-छोटे सामूहिक प्रयासों से ही संभव होती है। उन्होंने कहा कि सड़क की सफाई और झाड़ियों को हटाने जैसा कार्य भले ही छोटा दिखाई दे,लेकिन इससे यातायात सुगम होता है,दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश समाज तक पहुंचता है। देश के लिए समर्पण और सेवा किसी एक रूप में नहीं,बल्कि अपनी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार किसी भी रूप में की जा सकती है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि अपने गांव,शहर,सड़क,धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि हर व्यक्ति अपने आसपास के क्षेत्र को अपना समझकर उसकी देखभाल करे तो स्वच्छ और विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से साकार हो सकता है। भागीरथी कला संगम के इस अभियान ने यह भी संदेश दिया कि पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं,बल्कि स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। पहाड़ी मार्गों पर चीड़ की सूखी पत्तियों और झाड़ियों की समय-समय पर सफाई न केवल यातायात की दृष्टि से जरूरी है,बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अभियान के दौरान संस्था के सदस्यों ने लोगों से सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा न डालने,सड़कों के किनारे स्वच्छता बनाए रखने और प्राकृतिक संपदा की रक्षा करने की अपील की। इस अवसर पर भागीरथी कला संगम के संरक्षक रमेश चंद्र थपलियाल,संरक्षक राजेंद्र सिंह रावत,कोषाध्यक्ष हरेंद्र तोमर,अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल सहित संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ श्रमदान कर स्वच्छता अभियान को सफल बनाया। भागीरथी कला संगम का यह प्रयास निश्चित रूप से इस बात का उदाहरण है कि राष्ट्रसेवा केवल बड़े मंचों पर नहीं,बल्कि अपने आसपास के समाज,पर्यावरण और सार्वजनिक स्थलों की सेवा से भी शुरू होती है।

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