हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। भौतिकता और तकनीकी प्रगति के इस दौर में जहां जीवन की गति तेज हुई है,वहीं मानवीय संवेदनाएं,नैतिक मूल्य और आत्मिक चेतना निरंतर चुनौती के दौर से गुजर रही हैं। ऐसे समय में यदि कोई साहित्य पाठकों को जीवन के वास्तविक मूल्यों,चरित्र निर्माण और सकारात्मक चिंतन की ओर प्रेरित करे,तो वह केवल पुस्तक नहीं,बल्कि समाज के लिए एक जीवंत मार्गदर्शक बन जाता है। वरिष्ठ साहित्यकार,स्वर्ण पदक विजेता,राज्य एवं राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित शिक्षाविद् डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला की नवीन कृति अनमोल प्रेरणादायिनी प्रसंग ऐसी ही एक प्रेरक और जीवनोपयोगी पुस्तक है,जिसे प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं राजकीय इंटर कॉलेज स्वीत श्रीनगर के प्रधानाचार्य महेन्द्र सिंह नेगी ने नैतिक मूल्यों के पुनर्जागरण का सशक्त साहित्यिक दस्तावेज़ बताया है। अपनी विस्तृत समीक्षा में महेन्द्र सिंह नेगी लिखते हैं कि यह कृति केवल प्रेरक प्रसंगों का सामान्य संकलन नहीं,बल्कि जीवन-दर्शन,नैतिक चेतना,मानवीय संवेदनाओं और सकारात्मक सोच का ऐसा अनुपम ग्रंथ है,जो पाठकों को आत्ममंथन,आत्मविश्वास और जीवन में श्रेष्ठ मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है। पुस्तक में संकलित सौ से अधिक प्रेरक प्रसंग पाठक के मन-मस्तिष्क को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं और जीवन के प्रत्येक मोड़ पर सही दिशा का बोध कराते हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक में छात्र जीवन,राष्ट्रप्रेम,कर्तव्यनिष्ठा,गुरु-शिष्य परंपरा,ईमानदारी,अनुशासन,संयम,सेवा,त्याग और मानवीय करुणा जैसे शाश्वत जीवन मूल्यों को अत्यंत सरल,प्रभावशाली और रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक प्रसंग अपने भीतर गहन संदेश समेटे हुए है और पाठक को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करता है। समीक्षा में डॉ.चमोला की भाषा-शैली की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा गया है कि उनकी लेखनी सहज,सरल,प्रवाहपूर्ण और अत्यंत प्रभावी है। अनावश्यक जटिलता से मुक्त भाषा सीधे पाठकों के हृदय तक पहुंचती है। संवादों की स्वाभाविकता और घटनाओं का जीवंत चित्रण पुस्तक को अत्यंत रोचक और पठनीय बनाता है,जिससे पाठक प्रारंभ से अंत तक पुस्तक से जुड़ा रहता है। महेन्द्र सिंह नेगी ने इस पुस्तक की शैक्षणिक उपयोगिता को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं,नैतिक शिक्षा की कक्षाओं,बाल सभाओं तथा व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों में यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। विशेष रूप से विद्यार्थियों,युवाओं,शिक्षकों और अभिभावकों के लिए यह कृति एक उत्कृष्ट मार्गदर्शिका का कार्य करेगी तथा नई पीढ़ी में नैतिकता,अनुशासन,राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला ने अपने दीर्घ शैक्षणिक अनुभव,गहन अध्ययन,सामाजिक सरोकारों और साहित्यिक संवेदनशीलता को इस कृति में अत्यंत सुंदर ढंग से समाहित किया है। यही कारण है कि यह पुस्तक केवल पढ़ने योग्य नहीं,बल्कि प्रत्येक विद्यालय,महाविद्यालय,पुस्तकालय तथा साहित्य प्रेमियों के निजी संग्रह में स्थान पाने योग्य एक मूल्यवान धरोहर है। समीक्षक ने अंत में कहा कि अनमोल प्रेरणादायिनी प्रसंग वर्तमान समय में समाज के लिए आशा,संस्कार,सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों का प्रकाश स्तंभ बनकर उभरी है। यह पुस्तक निराशा के अंधकार में आशा का दीप प्रज्वलित करती है तथा पाठकों को सत्य,सदाचार,सेवा और राष्ट्र निर्माण के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है। इस कालजयी,प्रेरक और संग्रहणीय कृति के सृजन के लिए लेखक डॉ.अखिलेश चन्द्र चमोला निस्संदेह हार्दिक बधाई,साधुवाद और सम्मान के पात्र हैं।