श्रीनगर गणेश मंदिर में गूंजी श्रीकृष्ण अवतरण की दिव्य गाथा-कूर्म महापुराण कथा में धर्म स्थापना का संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पौराणिक,आध्यात्मिक,धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी श्रीनगर गढ़वाल के प्राचीन गणेश मंदिर में इन दिनों कूर्म महापुराण कथा का दिव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पौराणिक,आध्यात्मिक,धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी श्रीनगर गढ़वाल के प्राचीन गणेश मंदिर में इन दिनों कूर्म महापुराण कथा का दिव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आस्था,भक्ति और धर्मज्ञान का केंद्र बना हुआ है। कथा के दौरान मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार,भजन-कीर्तन एवं धार्मिक प्रसंगों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन कथा श्रवण कर पुण्यलाभ अर्जित कर रहे हैं। कूर्म महापुराण कथा के दौरान व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण से जुड़े अत्यंत भावपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म,अत्याचार और आसुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ता है,तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान का अवतार होता है। उन्होंने चंद्रवंश के राजाओं, यदुवंश की परंपरा तथा भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतरण का विस्तार से वर्णन किया। आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने कथा प्रसंग में बताया कि पृथ्वी पर दैत्यों के अत्याचार बढ़ने से धर्म और मर्यादा संकट में पड़ गई थी। गौ रूप धारण कर पृथ्वी ने देवताओं के समक्ष अपनी व्यथा रखी। देवताओं ने भगवान नारायण की शरण ग्रहण की। इसी प्रसंग में आकाशवाणी के माध्यम से यह दिव्य संदेश प्राप्त हुआ कि धर्म की स्थापना तथा अधर्म के विनाश के लिए भगवान नारायण के अंश रूप में भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण होगा। कथा में यदुवंश की गौरवशाली परंपरा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। राजा ययाति के विवाह,उनके वंश तथा आगे चलकर यदुवंश में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की कथा को आचार्य ने अत्यंत रोचक एवं आध्यात्मिक भाव से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण केवल कंस के अत्याचार के अंत के लिए नहीं,बल्कि समूचे संसार में धर्म,सत्य,न्याय और लोककल्याण की स्थापना के व्यापक संदेश का प्रतीक है। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं में सहयोग करने के लिए देवताओं ने भी विभिन्न रूपों में पृथ्वी पर अवतार लिया। गोप-गोपियों के रूप में भगवान की लीलाओं में सहभागी बनकर उन्होंने धर्म की स्थापना के दिव्य कार्य में सहयोग किया। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस के अत्याचार का अंत कर यह संदेश दिया कि अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो,अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। कथा के दौरान आचार्य ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग से जुड़े आध्यात्मिक संदेशों को वर्तमान सामाजिक जीवन से जोड़ते हुए कहा कि आज के समय में भी समाज को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनके उपदेशों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। सत्य,कर्तव्य,परोपकार,सेवा,सद्भाव और धर्म के मार्ग पर चलकर ही परिवार,समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है। गणेश मंदिर में चल रही कूर्म महापुराण कथा के आयोजन से श्रीनगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को भी नई ऊर्जा मिल रही है। कथा में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। कथा आयोजन में व्यासपीठ पर आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल के साथ आचार्य विद्वान पंडित मनीष डोभाल,वीरेन्द्र दत्त घिल्डियाल,संदीप पुरोहित,मनोज बंगवाल,संदीप उनियाल,भुवनेश भट्ट,नवीन सैफ तथा चन्द्र प्रकाश नैथानी सहित विद्वान आचार्यों की सहभागिता बनी हुई है। आयोजन को सफल बनाने में गणेश मंदिर के मुख्य पुजारी रामकृष्ण पाण्डे एवं प्रभात पाण्डे के साथ मुकेश जोशी,कुशलानंद भट्ट,राघव जोशी,सुरेंद्र चौहान,प्रवीण अग्रवाल,ट्रॉपिकल आइसक्रीम फैक्ट्री वाले संजय जैन,राजेंद्र सिंह कैंतुरा,राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल,सुरेंद्र कंडारी,गोपाल डुडेजा,शुभम पडिहार,सौरभ सिंह,कुमुद जोशी,विनायक अग्रवाल,मनीष बडोनी,राहुल रावत,आकाश अग्रवाल,भानेश असवाल,पारस बंसल,तुषार अनेजा सहित आयोजन मंडल से जुड़े श्रद्धालु एवं सहयोगी निरंतर जुटे हुए हैं। कथा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के नाम का संकीर्तन करते हुए धर्म,संस्कार और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प भी लिया। धार्मिक आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी पौराणिक परंपराओं,धार्मिक ग्रंथों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया जा रहा है। इस अवसर पर आज के मुख्य यजमान शार्दुल शाह ओम ज्वैलर्स श्रीनगर रहे। मुख्य यजमान सहित श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीगणेश एवं भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि,शांति एवं जनकल्याण की कामना की। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का कहना है कि श्रीनगर जैसे पौराणिक एवं धार्मिक नगर में इस प्रकार के आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं हैं,बल्कि यह समाज को अपनी जड़ों,संस्कारों और सनातन सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी हैं। कूर्म महापुराण कथा के माध्यम से श्रीनगर की धार्मिक चेतना एक बार फिर जन-जन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रही है।

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