एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय की हिमालयी वायुमंडलीय एवं अंतरिक्ष भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के भौतिकी विभाग स्थित हिमालयी वायुमंडलीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने वायुमंडलीय विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के भौतिकी विभाग स्थित हिमालयी वायुमंडलीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने वायुमंडलीय विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ताओं द्वारा भौतिकी-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके वायुमंडलीय ऊर्जा अंतरण विश्लेषण के लिए एक प्रणाली एवं विधि विषय पर विकसित तकनीक का पेटेंट प्रकाशित हुआ है। यह आविष्कार भौतिकी-सूचित कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित है,जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमताओं को वायुमंडलीय भौतिकी के मूलभूत नियमों के साथ जोड़ा गया है। इस तकनीक के माध्यम से विभिन्न पर्यावरणीय एवं वायुमंडलीय स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का एकीकृत विश्लेषण कर वायुमंडल में होने वाले ऊर्जा विनिमय एवं ऊर्जा अंतरण को समझने तथा उसका पुनर्निर्माण करने का प्रयास किया गया है। शोध के अंतर्गत बहु-स्रोत पर्यावरणीय संवेदन,संवेदकों की विश्वसनीयता का अनुकूली मूल्यांकन,विभिन्न वायुमंडलीय परतों के बीच पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण,भौतिक संरक्षण नियमों के आधार पर परिणामों का सत्यापन तथा अनिश्चितता के आधार पर आवश्यक अतिरिक्त आंकड़ों के अधिग्रहण जैसी तकनीकों को एकीकृत किया गया है। इसके साथ ही,व्याख्येय कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से प्राप्त परिणामों तथा ऊर्जा अंतरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों की वैज्ञानिक व्याख्या का भी प्रावधान किया गया है। शोध दल के अनुसार इस तकनीक का उद्देश्य वायुमंडलीय ऊर्जा गतिकी का अधिक सटीक,विश्वसनीय,भौतिक रूप से संगत एवं व्याख्येय आकलन उपलब्ध कराना है। यह शोध वायुमंडलीय प्रक्रियाओं के अध्ययन में आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं को भी रेखांकित करता है। यह शोध कार्य हिमालयी वायुमंडलीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला के मुख्य अन्वेषक डॉ.आलोक सागर गौतम के मार्गदर्शन में किया गया। वर्तमान में प्रयोगशाला में शोधरत शोध छात्र अमनदीप विश्वकर्मा,अंकित कुमार एवं सरस्वती रावत ने इस शोध कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा इसी प्रयोगशाला से अपना शोध कार्य पूर्ण कर चुके डॉ.करण सिंह एवं डॉ.संजीव कुमार ने भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान दिया। दोनों वर्तमान में भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान में परियोजना वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत हैं। शोध दल में डॉ.श्याम नारायण नौटियाल सहित सभी शोधकर्ताओं के संयुक्त प्रयास,वैज्ञानिक सहयोग एवं विशेषज्ञता के परिणामस्वरूप यह पेटेंट प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने इस उपलब्धि को वायुमंडलीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी के क्षेत्र में किए जा रहे अनुसंधान तथा प्रयोगशाला की वैज्ञानिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। इस अवसर पर डॉ.आलोक सागर गौतम ने कहा कि शोध छात्रों का उद्देश्य केवल अपने शोध विषय तक सीमित रहना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध कार्य के साथ-साथ छात्रों को पेटेंट,पुस्तक लेखन,पुस्तक अध्याय,इलेक्ट्रॉनिक सामग्री तथा अन्य शैक्षणिक एवं नवाचार संबंधी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहता है कि शोध छात्र अपने विषय में गहन शोध करने के साथ-साथ विभिन्न रचनात्मक एवं अकादमिक क्षेत्रों में भी दक्षता विकसित करें। इससे उनमें बहुआयामी शोध कौशल,रचनात्मक सोच और नवाचार की क्षमता विकसित होगी तथा वे भविष्य में शोध,शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में व्यापक योगदान देने में सक्षम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आज के बदलते वैज्ञानिक एवं तकनीकी परिवेश में शोध छात्रों के लिए केवल शोध-पत्र प्रकाशित करना ही पर्याप्त नहीं है,बल्कि उन्हें पेटेंट,पुस्तक,पुस्तक अध्याय,इलेक्ट्रॉनिक सामग्री,नवाचार एवं तकनीकी विकास जैसे क्षेत्रों से भी परिचित होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से शोध छात्रों को विभिन्न अकादमिक एवं नवाचार गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। शोध दल ने इस उपलब्धि को हिमालयी क्षेत्र में वायुमंडलीय अनुसंधान,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...