
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। एक वर्ष पूर्व 6 अगस्त को पाबौ विकासखंड के बुरासी और सैंजी गांवों पर प्रकृति ने ऐसा कहर बरपाया था,जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। मूसलाधार वर्षा और भीषण भूस्खलन ने कई परिवारों का आशियाना छीन लिया,जनहानि हुई, सड़कें ध्वस्त हो गईं,पेयजल और विद्युत आपूर्ति ठप पड़ गई तथा पूरा क्षेत्र संकट के दौर से गुजरने लगा। लेकिन आज ठीक एक वर्ष बाद,वही गांव पुनर्निर्माण,पुनर्वास और विकास की नई कहानी लिख रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा समयबद्ध राहत,पुनर्वास और आधारभूत सुविधाओं के पुनर्निर्माण ने इन गांवों को फिर से आत्मविश्वास और सम्मान के साथ खड़ा कर दिया है। आपदा की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत के साथ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देहरादून में आपदा प्रभावितों से मुलाकात कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागों के समन्वय से युद्धस्तर पर राहत एवं पुनर्निर्माण अभियान संचालित करते हुए प्रभावित परिवारों तक समय पर हर आवश्यक सहायता पहुंचाई। बुरासी गांव में क्षतिग्रस्त मकानों,गौशालाओं और सुरक्षा दीवारों के पुनर्निर्माण के साथ-साथ सड़क,पेयजल और विद्युत जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया गया। प्रशासन ने संपर्क मार्गों को शीघ्र सुचारु कराया और सुरक्षा कार्यों को पूरा कर ग्रामीणों के जीवन को फिर से सामान्य बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए। आज गांव में जनजीवन पूरी तरह पटरी पर लौट चुका है और आधारभूत सुविधाएं पहले से अधिक सुदृढ़ रूप में उपलब्ध हैं। सैंजी गांव में आपदा से प्रभावित सभी 16 परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। जिन सात परिवारों की भूमि पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी,उन्हें राज्य आपदा मोचन निधि के विस्थापन मद से 4.25 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता देकर नए मकानों का निर्माण कराया गया। एक वर्ष पहले अस्थायी आश्रयों में रहने को विवश परिवार आज अपने नए घरों में सुरक्षित,सम्मानजनक और आत्मविश्वास से भरा जीवन जी रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आपदा की उस कठिन घड़ी में सरकार और जिला प्रशासन ने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। राहत सामग्री,चिकित्सा सुविधा,भोजन,पुनर्वास और आधारभूत सुविधाओं की शीघ्र बहाली ने उनमें फिर से विश्वास जगाया। गांवों में सड़क,बिजली,पेयजल और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं के बेहतर होने से लोगों का जीवन सामान्य हो चुका है और विकास कार्यों ने नई गति पकड़ ली है। सैंजी की ग्राम प्रधान रेखा देवी ने कहा कि सरकार और प्रशासन की निरंतर निगरानी तथा संवेदनशील कार्यशैली का ही परिणाम है कि आज सभी प्रभावित परिवार सम्मानपूर्वक अपने नए घरों में रह रहे हैं। वहीं बुरासी की ग्राम प्रधान बबीता देवी ने कहा कि आपदा ने गांव को गहरे जख्म दिए थे,लेकिन सरकार,प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों ने गांव को फिर से खड़ा कर दिया और अधिकांश विकास कार्य अब पूरे हो चुके हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं,बल्कि मानवीय उत्तरदायित्व के रूप में लिया। राहत वितरण से लेकर सुरक्षित आवास,आधारभूत सुविधाओं की बहाली और आजीविका को पुनः स्थापित करने तक प्रत्येक कार्य समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी किसी भी आपदा की स्थिति में सरकार पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ प्रभावित लोगों के साथ खड़ी रहेगी। आज बुरासी और सैंजी गांव केवल पुनर्निर्माण की कहानी नहीं,बल्कि संवेदनशील शासन,प्रभावी प्रशासन और जनसहभागिता की प्रेरक मिसाल बन चुके हैं। जहां एक वर्ष पहले मलबा,भय और निराशा का माहौल था,वहीं आज नए घर,मजबूत आधारभूत सुविधाएं और ग्रामीणों के चेहरों पर लौटती मुस्कान इस बात का प्रमाण हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति,त्वरित निर्णय और समन्वित प्रयासों से किसी भी आपदा के घावों पर विकास और विश्वास का मरहम लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के राहत से पुनर्वास और पुनर्वास से पुनर्विकास के संकल्प ने इन गांवों में केवल निर्माण कार्य ही नहीं,बल्कि लोगों के जीवन में नई आशा,नया विश्वास और नए भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त किया है।