हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय का लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र इन दिनों राष्ट्रीय रंगमंचीय गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) नई दिल्ली द्वारा विश्वविद्यालय को सौंपी गई प्रतिष्ठित नाट्य परियोजना के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला में देश के युवा रंगकर्मियों को अभिनय और मंचीय कला की उच्चस्तरीय शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस पहल ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के रंगमंचीय प्रशिक्षण से सीधे जुड़ने का सुनहरा अवसर उपलब्ध कराया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का संचालन केंद्र के सहायक निदेशक एवं नाटक निर्देशक महेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में अभिनय कौशल,रंगमंचीय अनुशासन,सृजनात्मक सोच तथा प्रस्तुति क्षमता का समग्र विकास करना है,ताकि वे भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रंगमंच पर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन कर सकें। कार्यशाला में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के वर्ष 2016 बैच के अभिनय स्नातक चैतन्य सोलंकर पिछले दस दिनों से विद्यार्थियों को गहन प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। महाराष्ट्र से आए सोलंकर अभिनय की बारीकियों,चरित्र निर्माण,संवाद अदायगी,शारीरिक अभिव्यक्ति,मंचीय अनुशासन,दृश्य संयोजन तथा रंगमंचीय प्रस्तुति की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके निर्देशन में विद्यार्थी केवल अभिनय ही नहीं,बल्कि नाटक की संपूर्ण रचनात्मक प्रक्रिया को भी निकट से समझ रहे हैं। केंद्र के निदेशक गणेश खुगशाल गणी ने कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की यह परियोजना विश्वविद्यालय और लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। इससे विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सीखने और अपनी प्रतिभा को नई दिशा देने का अवसर मिल रहा है। उपनिदेशक डॉ.संजय पांडे ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय रंगमंच की कार्यप्रणाली से परिचित कराना तथा उनके अभिनय,तकनीकी दक्षता और मंचीय समझ को सुदृढ़ बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व,रचनात्मकता और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सहायक निदेशक एवं नाटक निर्देशक महेंद्र सिंह ने कहा कि एनएसडी के प्रशिक्षित कलाकारों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को पेशेवर रंगमंच की कार्यशैली को निकट से समझने का अवसर मिल रहा है। यह अनुभव उनके भविष्य के रंगमंचीय और सांस्कृतिक जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। कार्यशाला में शामिल छात्र-छात्राएं पूरे उत्साह,अनुशासन और समर्पण के साथ नियमित अभ्यास कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में नाट्य प्रस्तुति की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। केंद्र का वातावरण इन दिनों सृजनात्मक ऊर्जा,कलात्मक अनुशासन और रंगमंचीय उत्साह से सराबोर है,जो विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।