
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय को चौरास स्टेडियम प्रकरण में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्वविद्यालय पर लगाए गए लगभग 9.90 करोड़ रुपये के रॉयल्टी एवं अर्थदंड को माफ किए जाने के संबंध में सकारात्मक रुख अपनाते हुए आगामी कैबिनेट बैठक में इस विषय पर प्रस्ताव लाने का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन से विश्वविद्यालय प्रशासन,छात्र-छात्राओं तथा समूचे गढ़वाल क्षेत्र में नई उम्मीद का संचार हुआ है। कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिला और पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी देते हुए जनहित,छात्रहित एवं विश्वविद्यालय हित को सर्वोपरि मानते हुए रॉयल्टी एवं अर्थदंड की पूरी राशि माफ करने का अनुरोध किया। प्रतिनिधिमंडल में स्कूल ऑफ अर्थ साइंस के अधिष्ठाता प्रो.महावीर सिंह नेगी,नियुक्ति एवं पदोन्नति अधिष्ठाता प्रो.एम.एस.पवार तथा जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा शामिल रहे। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रारंभिक स्तर पर इस प्रकरण में लगभग 1.90 करोड़ रुपये की रॉयल्टी निर्धारित की गई थी,लेकिन बाद में इसे अर्थदंड सहित बढ़ाकर 9.90 करोड़ रुपये कर दिया गया। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि जिस स्थान पर ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की सुरंगों से निकले मलबे का उपयोग किया गया,उसका उद्देश्य किसी प्रकार का व्यावसायिक लाभ अर्जित करना नहीं था,बल्कि आपदा से प्रभावित क्षेत्र का पुनर्वास और जनसुविधाओं को बहाल करना था। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान अलकनंदा नदी के भीषण कटाव से श्रीनगर-चौरास क्षेत्र को जोड़ने वाला मार्ग तथा विश्वविद्यालय का खेल मैदान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद क्षेत्र की सुरक्षा,नदी के कटाव पर नियंत्रण तथा आवागमन सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) की सुरंगों से निकले मलबे का वैज्ञानिक ढंग से पुनर्भरण कार्य में उपयोग किया गया। वर्तमान में इसी समतल क्षेत्र के ऊपर से अनेक गांवों को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है,जिससे हजारों ग्रामीणों को सीधा लाभ मिल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्यमंत्री को यह भी स्मरण कराया कि इससे पूर्व एक छात्र कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वयं इस मामले को जनहित से जुड़ा बताते हुए विश्वविद्यालय को राहत दिलाने का आश्वासन दिया था। उसी क्रम में अब विश्वविद्यालय ने अनुरोध किया है कि आगामी कैबिनेट बैठक में इस विषय को शामिल कर विश्वविद्यालय पर लगाए गए रॉयल्टी एवं अर्थदंड को पूर्णतः माफ किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि इस मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल,देवप्रयाग विधायक विनोद कंडारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि लगातार प्रयासरत रहे हैं। जुलाई 2023 में जिलाधिकारी टिहरी द्वारा भी शासन को रॉयल्टी माफी का प्रस्ताव भेजा गया था। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय का प्रतिनिधिमंडल हाल ही में मुख्य सचिव आनंद वर्धन,सचिव (खनन) बृजेश कुमार संत तथा निदेशक (खनन) राजपाल लेघा से भी मुलाकात कर पूरे मामले की वस्तुस्थिति से अवगत करा चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह प्रकरण किसी व्यावसायिक गतिविधि से जुड़ा नहीं,बल्कि आपदा प्रभावित क्षेत्र के पुनर्वास,जनसुविधाओं की बहाली तथा सामाजिक दायित्व के निर्वहन से संबंधित है। इसलिए राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह इस केंद्रीय शिक्षण संस्थान के व्यापक शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय को आर्थिक राहत प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सकारात्मक आश्वासन के बाद अब विश्वविद्यालय परिवार की निगाहें आगामी कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है,तो न केवल विश्वविद्यालय को लगभग 9.90 करोड़ रुपये के आर्थिक बोझ से मुक्ति मिलेगी,बल्कि प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और जनहित के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का भी सशक्त संदेश जाएगा।