हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर श्रीनगर स्थित अस्थायी गौशाला में आयोजित धार्मिक,सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम श्रद्धा,सेवा और भारतीय सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रेरणादायी केंद्र बना। कार्यक्रम में उपस्थित गौभक्तों एवं गौसेवकों ने गौशाला का निरीक्षण कर वहां संरक्षित सभी गौवंशों की सेवा व्यवस्था का अवलोकन किया। स्वस्थ एवं सुरक्षित गौवंश को देखकर सभी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए गौ सेवा को राष्ट्र सेवा का सर्वोच्च माध्यम बताया। इस अवसर पर गौ संरक्षण,गौ संवर्धन तथा गौशाला के विस्तारीकरण सहित भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता केवल एक पशु नहीं,बल्कि आस्था,समृद्धि,स्वास्थ्य,कृषि,पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक हैं। गौ सेवा के माध्यम से समाज में सेवा,करुणा और मानवीय मूल्यों का विकास होता है,जो राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। कार्यक्रम में बताया गया कि गौभक्तों के सहयोग से पूर्व में गौ सेवा संवर्धन संस्था का गठन किया गया है,जिसमें सभी सदस्य स्वेच्छा से आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग देकर गौ संरक्षण के इस पुनीत अभियान को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। संस्था द्वारा गौशाला के बेहतर संचालन,सुविधाओं के विस्तार तथा निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए व्यापक जनसहभागिता का आह्वान भी किया गया। गौ सेवा के क्षेत्र में निःस्वार्थ,समर्पित एवं सतत योगदान देने वाले गौसेवक अनुज जोशी को जय शिव गोरखनाथ गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर के उपासक नरेश कुमार भारती द्वारा गुरु पूर्णिमा महोत्सव सम्मान से सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों ने इस सम्मान को गौ सेवा के प्रति समर्पित सभी स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए अनुज जोशी के सेवा भाव की सराहना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपासक नरेश कुमार भारती ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में गौ माता का स्थान सर्वोच्च है। जन्म से लेकर जीवन के अंतिम संस्कार तक मानव जीवन के सोलह संस्कारों एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में गौ आधारित उत्पादों का विशेष महत्व है। नवजात शिशु के पोषण में गाय के दूध की भूमिका,धार्मिक अनुष्ठानों में गौमूत्र एवं गोबर का उपयोग तथा यज्ञ-हवन की पवित्र परंपरा भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विरासत का परिचायक है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं,बल्कि पर्यावरण संरक्षण,जैविक खेती,ग्रामीण अर्थव्यवस्था,स्वास्थ्य और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने देशभर के गौ-प्रेमियों से आह्वान किया कि प्रत्येक माह की 27 तारीख को अपनी-अपनी तहसीलों के माध्यम से सरकार को ज्ञापन देकर गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान करें। कार्यक्रम के अंत में गौ सेवा,गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया तथा सभी नागरिकों से अपने सामर्थ्य के अनुसार गौशालाओं के सहयोग और निराश्रित गौवंश की सेवा के लिए आगे आने का आग्रह किया गया। इस अवसर पर गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर के उपासक नरेश कुमार भारती,गौसेवा संवर्धन समिति के अध्यक्ष अनुज जोशी,गौ सेवा संवर्धन समिति के उपाध्यक्ष आनन्द सिंह भण्डारी,राजेन्द्र प्रसाद बड़थ्वाल,रूपेश जोशी सहित बड़ी संख्या में गौभक्त,गौसेवक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।