गुरु पूर्णिमा महोत्सव में उमड़ा आस्था का महासागर,भैरवनाथ-गुरु गोरक्षनाथ मंदिर बना श्रद्धा,सेवा और सनातन संस्कृति का दिव्य संगम

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक परंपरा,गुरु-शिष्य संस्कृति और सनातन आस्था का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला जब श्रीनगर की नागेश्वर गली स्थित प्राचीन श्री भैरवनाथ-गुरु गोरक्षनाथ

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक परंपरा,गुरु-शिष्य संस्कृति और सनातन आस्था का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला जब श्रीनगर की नागेश्वर गली स्थित प्राचीन श्री भैरवनाथ-गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा,भक्ति और उत्साह के साथ भव्य रूप से मनाया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। वैदिक मंत्रोच्चार,गुरु वंदना,पूजा-अर्चना,भजन-कीर्तन तथा विशाल भंडारे के माध्यम से श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए धर्म,सेवा और संस्कारों की महान परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु भगवान भैरवनाथ एवं गुरु गोरक्षनाथ के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे। वातावरण जय शिव गोरक्षनाथ और हर-हर महादेव के जयघोषों से भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर अपने जीवन में ज्ञान,सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर की सेवा,संरक्षण और सौंदर्यीकरण का दायित्व वर्षों से निष्ठापूर्वक निभा रहे मनोज बंगवाल के सेवा-भाव और समर्पण की सभी श्रद्धालुओं ने मुक्तकंठ से सराहना की। उनके सतत प्रयासों से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है तथा यह प्राचीन देवस्थल धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। इस अवसर पर जय शिव गोरक्षनाथ गढ़खालेश्वर महादेव मंदिर भटोली के महंत नरेश कुमार भारती ने सामाजिक,धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान तथा मंदिर के प्रति उनकी निष्ठावान सेवा को देखते हुए मनोज बंगवाल को गुरु पूर्णिमा महोत्सव सम्मान से सम्मानित किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस सम्मान को सेवा और समर्पण की भावना का सम्मान बताते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। अपने प्रेरक उद्बोधन में महंत नरेश कुमार भारती ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं,बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। गुरु ही वह दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। उन्होंने महर्षि वेदव्यास के जीवन एवं योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि आज का दिन वेद,पुराण और महाभारत जैसे अमूल्य ग्रंथों के रचयिता महर्षि वेदव्यास को समर्पित है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। उन्होंने नाथ संप्रदाय की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए गुरु मत्स्येन्द्रनाथ एवं गुरु गोरक्षनाथ के जीवन प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा और शिक्षा ही साधक को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाती है। गुरु-शिष्य की यह परंपरा भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है,जो मानवता को सत्य,सेवा,संयम और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाती है। महंत नरेश कुमार भारती ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को आध्यात्मिक मूल्यों,नैतिक संस्कारों और गुरु परंपरा से पुनः जोड़ने की आवश्यकता है। गुरु के प्रति श्रद्धा,सेवा और समर्पण का भाव ही व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाता है तथा समाज में सद्भाव,संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया,जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म,सेवा और समरसता की भावना को आत्मसात किया। यह भंडारा श्रीनगर क्षेत्र के श्रद्धालुओं एवं समाजसेवियों के सहयोग,समर्पण और धार्मिक आस्था से संपन्न हुआ। गढ़खालेश्वर के महंत नरेश कुमार भारती ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए नाथ संप्रदाय की गौरवशाली परंपरा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने वेदव्यास भगवान गुरु गोरक्षनाथ एवं गुरु मछिंद्रनाथ की दिव्या गुरु शिष्य परंपरा का स्नान करते हुए कहा कि गुरु ही मानव जीवन को आज्ञा की अंधकार से निकलकर ज्ञान,संस्कार और आत्मबोध के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने इस अवसर पर योगी चौरंगी नाथ,सीताराम भोपालनाथ एवं श्याम गिरी महाराज को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि इन महान संतों ने तब त्याग साधना मानव सेवा तथा लोक कल्याण के माध्यम से सनातन संस्कृति और गुरु शिष्य परंपरा को नई ऊंचाइयां प्रदान की है। उनके आदर्श आज भी समाज को सत्य सेवा सदाचार आध्यात्मिक जागरण और राष्ट्रीय धर्म की मार्ग पर चने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल गुरु वंदन का पर्व नहीं है बल्कि भारतीय संस्कृति,आध्यात्मिक चेतना,नैतिक मूल्य और मानव कल्याण के संकल्प को पुनः आत्मसात करने का महापर्व है। कार्यक्रम में मनोज बंगवाल, दिगंबर भट्ट,किशोर चमोली,संजय जैन,अभय पंवार,सुधीर भट्ट,कालीचरण, महिपाल सिंह बिष्ट,आनंद सिंह भण्डारी,मोनू भण्डारी,गोपाल कृष्ण घिल्डियाल सहित श्रीनगर के अनेक गणमान्य नागरिक,श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित रहे। गुरु पूर्णिमा महोत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु के ज्ञान,आशीर्वाद और मार्गदर्शन से ही व्यक्ति का जीवन प्रकाशित होता है तथा समाज में धर्म,संस्कृति,सेवा और मानवता के श्रेष्ठ आदर्शों की स्थापना संभव होती है।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...