प्रेमचंद की कालजयी लेखनी को श्रीनगर का नमन-साहित्यिक समारोह में गूंजे सामाजिक चेतना के स्वर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हिंदी साहित्य के अमर कथाकार,उपन्यास सम्राट एवं युगद्रष्टा साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की 146 वीं जयंती पर श्रीनगर पब्लिक लाइब्रेरी में एक गरिमामय साहित्यिक समारोह का आयोजन किया

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हिंदी साहित्य के अमर कथाकार,उपन्यास सम्राट एवं युगद्रष्टा साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की 146 वीं जयंती पर श्रीनगर पब्लिक लाइब्रेरी में एक गरिमामय साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमियों,शिक्षाविदों,समाजसेवियों,विद्यार्थियों एवं स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि प्रेमचंद केवल एक लेखक नहीं,बल्कि भारतीय समाज की आत्मा के सशक्त स्वर थे,जिनकी लेखनी आज भी सामाजिक चेतना,मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शन करती है। कार्यक्रम का शुभारंभ छात्र वक्ता तन्मय ने मुंशी प्रेमचंद के प्रेरक जीवन,संघर्षपूर्ण साहित्यिक सफर तथा आधुनिक हिंदी साहित्य के विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए किया। उन्होंने बताया कि प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से समाज के उपेक्षित,शोषित और वंचित वर्गों की पीड़ा को शब्द दिए तथा साहित्य को जनजागरण का प्रभावी माध्यम बनाया। साहित्यिक संध्या को भावपूर्ण स्वर प्रदान करते हुए अशोक कुमार ने हल्द्वानी के कवि इस्लाम हुसैन द्वारा प्रेमचंद पर लिखी गई मार्मिक कविता का प्रभावशाली पाठ किया। कविता ने उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया और सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। कार्यक्रम की विशिष्ट वक्ता डॉ.रेशमा पंवार ने प्रेमचंद की साहित्य साधना पर विस्तार से विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी लेखक के लिए अपने जीवनकाल में चार सौ से अधिक कहानियों का सृजन करना अपने आप में अद्वितीय उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने केवल अधिक लिखा ही नहीं,बल्कि प्रत्येक रचना में सामाजिक सरोकार,मानवीय संवेदना और यथार्थ का अद्भुत संतुलन भी बनाए रखा। उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी अपने समय में थीं। समाजसेवी डॉ.मुकेश सेमवाल ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य सामाजिक परिवर्तन का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने अपनी कलम के माध्यम से जातिगत भेदभाव,शोषण,गरीबी,अशिक्षा,रूढ़ियों और अन्य सामाजिक कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया तथा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना को भी साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य नई पीढ़ी को संवेदनशील,जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त शिक्षक डी.एस.पटवाल,समाजसेवी डॉ.प्रदीप अणथ्वाल,ऋतुराज,शंभू,निशा,अजय सहित अनेक शिक्षाविद,साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन मोनिका चौहान ने किया। समारोह के अंत में उपस्थित सभी साहित्य प्रेमियों ने संकल्प लिया कि मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में निहित मानवीय मूल्यों,सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे साहित्यिक आयोजनों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।

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