हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। शासन और जनता के बीच की दूरी तब समाप्त होती है,जब अधिकारी स्वयं गांव की चौखट तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उनके समाधान के लिए मौके पर ही निर्णय लेते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जनकल्याणकारी सोच को धरातल पर उतारते हुए पौड़ी की जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने विकासखंड खिर्सू के निर्मल ग्राम कठूड़ में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर जनसमस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान उन्होंने गांव में चल रहे विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए शिक्षा,स्वास्थ्य,सड़क,कृषि और आधारभूत सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट एवं समयबद्ध निर्देश दिए। गांव पहुंचने पर जिलाधिकारी का पारंपरिक ढोल-दमाऊं की मंगलध्वनि और स्थानीय ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत ने पूरे वातावरण को उत्साह और उल्लास से भर दिया। उन्होंने गांव के नवनिर्मित भव्य प्रवेश द्वार का लोकार्पण किया। ग्राम प्रधान संजय थपलियाल,महिला मंगल दल की अध्यक्ष पूजा देवी तथा ग्रामवासियों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया,जबकि पूर्व ग्राम प्रधान श्रवण थपलियाल ने अभिनंदन पत्र का वाचन कर गांव की विकास यात्रा से अवगत कराया। इस अवसर पर उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक कंडी भेंट कर जिलाधिकारी को सम्मानित किया गया। चौपाल के दौरान उन्होंने गांव की 94 वर्षीय वरिष्ठ महिला धुपणी देवी का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया,जिसने पूरे कार्यक्रम को भावनात्मक गरिमा प्रदान की। चौपाल में ग्रामीणों ने कोटी से कमेड़ा-कठूली सड़क निर्माण,पौड़ी-श्रीनगर मोटर मार्ग से गांव तक संपर्क मार्ग तथा अन्य विकास कार्यों की मांग प्रमुखता से रखी। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समयसीमा में प्रारंभ किया जाए तथा प्रत्येक चरण की जानकारी ग्रामीणों तक भी नियमित रूप से पहुंचाई जाए। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि आवश्यक सर्वेक्षण एवं स्वीकृति प्रक्रियाएं लगभग पूर्ण हो चुकी हैं तथा आगामी दिनों में निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रशासन की तत्परता से ग्रामीणों में विश्वास और उत्साह का वातावरण देखने को मिला। ग्रामीणों द्वारा पशुओं के लिए चारे की समस्या उठाए जाने पर जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत,कृषि एवं उद्यान विभाग को समन्वित रूप से नेपियर घास एवं अन्य चारा फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए कृषि और पशुपालन को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यदि प्राथमिक विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ती है तो विद्यालय को पुनः संचालित कराने के लिए शासन स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने अभिभावकों से सरकारी विद्यालयों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विकसित समाज की सबसे मजबूत नींव है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गांव में स्थापित सीसीटीवी व्यवस्था,पंचायत भवन,आंगनबाड़ी केंद्र,कंपोस्ट पिट तथा अन्य जनसुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि कठूड़ ग्राम पंचायत योजनाबद्ध विकास,स्वच्छता और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि विकास केवल सरकारी धन से नहीं,बल्कि जनभागीदारी,सकारात्मक सोच और सामूहिक प्रयासों से संभव होता है। जिला प्रशासन ग्राम पंचायत की प्रत्येक जनहितकारी आवश्यकता में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। ग्रामीणों ने भी बताया कि गांव में अधिकांश मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंच रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन की सक्रिय कार्यशैली और जनहितकारी प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। चौपाल के उपरांत जिलाधिकारी ने जनता इंटरमीडिएट कॉलेज,जामणाखाल का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने स्वयं ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखकर विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता का आकलन किया। कक्षा आठ की छात्रा गायत्री द्वारा दिए गए संतोषजनक उत्तरों की उन्होंने प्रशंसा की और सभी विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। विद्यार्थियों से करियर विकल्पों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ विज्ञान,प्रौद्योगिकी,अनुसंधान,कृषि,पर्यटन,खेल,उद्यमिता तथा प्रशासनिक सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में उज्ज्वल संभावनाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी रुचि एवं प्रतिभा के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित कर कठिन परिश्रम से सफलता अर्जित करने का संदेश दिया। विद्यालय की विद्युत व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए जिलाधिकारी ने सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए तथा नियमित करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित करने को कहा। विज्ञान प्रयोगशाला का समुचित विकास न होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए आधुनिक प्रयोगशाला शीघ्र विकसित करने तथा विज्ञान उपकरणों को व्यवस्थित ढंग से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात जिलाधिकारी ने राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय,जामणाखाल का निरीक्षण कर औषधि कक्ष,दवा पंजिका,स्वास्थ्य अभिलेखों एवं अन्य व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने दवाओं के सुव्यवस्थित रखरखाव,चिकित्सालय परिसर की स्वच्छता,ओपीडी में वृद्धि तथा प्रत्येक सप्ताह नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही चिकित्सालय के स्थायी भवन हेतु भूमि प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने तथा उपलब्ध शासकीय भवन का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए करने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए। कार्यक्रम में जिला पंचायत राज अधिकारी जितेंद्र कुमार,उप जिलाधिकारी नूपुर वर्मा,जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक अंशुल बिष्ट,जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ.शैलेन्द्र पाण्डेय,आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ.राकेश सेमवाल,लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता किशोर कुमार,प्रधानाचार्य हेमेन्द्र डोभाल,पूर्व ग्राम प्रधान मेहरबान सिंह थपलियाल,श्रवण थपलियाल,मंगल सिंह असवाल,बुद्धि सिंह भंडारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी,जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन कठूड़ निवासी एवं रेडक्रॉस के जिला सचिव केसर सिंह असवाल ने किया। निर्मल ग्राम कठूड़ की चौपाल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जब प्रशासन संवेदनशील हो,जनभागीदारी सशक्त हो और विकास की सोच स्पष्ट हो,तब गांव केवल विकसित नहीं होते,बल्कि पूरे जनपद के लिए प्रेरणा बन जाते हैं।