हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं,बल्कि वहां विकसित होने वाली शोध संस्कृति,नैतिक मूल्यों और विद्यार्थी-शिक्षक संवाद से होती है। इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की छात्र सलाहकार समिति ने कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में बुधवार को छात्र संवाद कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया। कार्यक्रम में गुणवत्तापूर्ण शोध,नैतिक मूल्यों,भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास पर विशेष बल दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के मुख्य छात्र सलाहकार प्रो.एम.एम.सेमवाल ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि छात्र सलाहकार समिति विश्वविद्यालय में सकारात्मक,नैतिक एवं शोधोन्मुख शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध,शोध नैतिकता तथा शोध कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने के उद्देश्य से समय-समय पर कार्यशालाएं,प्रशिक्षण कार्यक्रम और संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे,ताकि शोधार्थियों को आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों के साथ-साथ अकादमिक ईमानदारी के महत्व की भी जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक शक्ति उसके विद्यार्थी होते हैं। यदि विद्यार्थियों के बीच संवाद,सहयोग और विश्वास का वातावरण विकसित हो तो शोध और नवाचार की नई संभावनाएं स्वतः विकसित होती हैं। उन्होंने शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वस्थ शैक्षणिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट शोध संस्कृति के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर संयुक्त छात्र सलाहकार प्रो.सीमा धवन ने कहा कि छात्र सलाहकार समिति का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान करना नहीं,बल्कि उनके व्यक्तित्व,नैतिक मूल्यों,सकारात्मक सोच,नेतृत्व क्षमता और रचनात्मक दृष्टिकोण का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच निरंतर संवाद ही एक स्वस्थ एवं संस्कारयुक्त शैक्षणिक वातावरण की आधारशिला है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए उप छात्र सलाहकार डॉ.कविता भट्ट ने उपनिषदों के मंत्रों का उल्लेख करते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें साथ मिलकर सीखने,परस्पर सहयोग करने,द्वेष से दूर रहने तथा समाज और राष्ट्र के व्यापक हित में कार्य करने की प्रेरणा देती है। आज की युवा पीढ़ी यदि इन मूल्यों को अपनाए तो वह राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि छात्र सलाहकार समिति भविष्य में भी विद्यार्थियों को करियर मार्गदर्शन,शैक्षणिक परामर्श,शोध संबंधी सहयोग तथा विभिन्न अकादमिक गतिविधियों के लिए प्रभावी मंच उपलब्ध कराती रहेगी,जिससे विद्यार्थियों की प्रतिभा को सही दिशा मिल सके। उप छात्र सलाहकार डॉ.अमरजीत परिहार ने विद्यार्थियों के मध्य सहयोग,समन्वय,स्वस्थ प्रतिस्पर्धा तथा सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा का उद्देश्य एक-दूसरे को पीछे छोड़ना नहीं,बल्कि स्वयं को बेहतर बनाना होना चाहिए। कार्यक्रम में शिक्षा संकाय के शिक्षा,योग एवं शारीरिक शिक्षा सहित विभिन्न विभागों के शोधार्थियों ने अपने शोध कार्यों,शैक्षणिक गतिविधियों तथा अध्ययन से संबंधित सुझाव और समस्याएं समिति के समक्ष रखीं। समिति ने सभी विषयों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायी क्षण तब रहा जब सभी शोधार्थियों ने शोध नैतिकता की शपथ लेते हुए संकल्प लिया कि वे अपने अनुसंधान कार्य में किसी भी प्रकार की साहित्यिक चोरी का सहारा नहीं लेंगे तथा पूर्ण ईमानदारी,मौलिकता और अकादमिक सत्यनिष्ठा के साथ शोध कार्य करेंगे। यह संकल्प विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट एवं विश्वसनीय शोध संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया। इस अवसर पर डॉ.शंकर सिंह,संतोष घिल्डियाल एवं गौरव पड़ियार ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि छात्र सलाहकार समिति द्वारा भविष्य में भी विभिन्न संकायों में नियमित रूप से छात्र संवाद,कार्यशालाएं,प्रशिक्षण सत्र तथा मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे,ताकि विद्यार्थियों की प्रतिभा को नई दिशा मिल सके,शोध संस्कृति को और अधिक समृद्ध बनाया जा सके तथा विश्वविद्यालय में रचनात्मक,सकारात्मक और मूल्यपरक शैक्षणिक वातावरण को नई मजबूती प्रदान की जा सके।