हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। किसी भी लोकतांत्रिक समाज की वास्तविक पहचान तभी होती है,जब समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अधिकार,सम्मान और न्याय मिले। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों की सुरक्षा,सम्मान और अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गंभीर पहल की है। इसी क्रम में बुधवार को विकास भवन स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष में मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी की अध्यक्षता में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन,लंबित मामलों की समीक्षा,पीड़ितों को समयबद्ध आर्थिक सहायता,पुनर्वास,सुरक्षा एवं न्याय उपलब्ध कराने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अधिनियम से संबंधित प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध,निष्पक्ष और पूरी संवेदनशीलता के साथ निस्तारण सुनिश्चित किया जाए,ताकि पीड़ितों को न्याय के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित सभी प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन किया जाए तथा पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार आर्थिक सहायता एवं अन्य सुविधाएं बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अधिकारों की रक्षा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं,बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय और गंभीरता के साथ कार्य करें। बैठक में समिति के सदस्यों ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के सामाजिक,आर्थिक एवं शैक्षिक उत्थान से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी निगरानी,जागरूकता कार्यक्रमों के विस्तार तथा पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि समिति द्वारा लिए गए सभी निर्णयों का निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा समय-समय पर उसकी प्रगति रिपोर्ट समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को न्याय,सुरक्षा और सम्मान का वातावरण मिले तथा शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। बैठक में समिति के सदस्य नरेंद्र प्रसाद टम्टा,गेंदा लाल टम्टा,हरीश चंद्र,अंकित घाघट,उपनिरीक्षक प्रवीण रावत,सहायक जिला समाज कल्याण अधिकारी रणजीत रावत,सहायक जिला सूचना अधिकारी प्रदीप सुंदरियाल,क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी मनोज कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है,बल्कि पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन,सुरक्षा और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना भी है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।