संस्कार,शिक्षा और ग्राम जागरण का सशक्त अभियान-एकल से गढ़ा जाएगा आत्मनिर्भर व चरित्रवान भारत

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं,बल्कि उनके व्यक्तित्व,संस्कार,प्रतिभा और जीवन मूल्यों का समग्र विकास करना है। जब शिक्षा ज्ञान के साथ संस्कार,सामाजिक चेतना

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं,बल्कि उनके व्यक्तित्व,संस्कार,प्रतिभा और जीवन मूल्यों का समग्र विकास करना है। जब शिक्षा ज्ञान के साथ संस्कार,सामाजिक चेतना और आत्मविश्वास का समन्वय करती है,तभी एक सशक्त,जागरूक और राष्ट्रनिष्ठ समाज का निर्माण संभव होता है। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से एकल अभियान के अंतर्गत चमोली में आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में शिक्षकों को समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का बोध कराया गया। प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित करते हुए एकल अभियान गढ़वाल भाग के अध्यक्ष कालिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं होना चाहिए,बल्कि बालक की जन्मजात क्षमताओं,प्राकृतिक गुणों और रचनात्मक प्रतिभा का समुचित विकास करना भी शिक्षा का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में प्रतिभा बीज के समान विद्यमान होती है,जिसे उचित मार्गदर्शन,निरंतर अभ्यास,अनुशासन और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में परिवार और सामाजिक परिवेश की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावकों को बच्चों की जिज्ञासाओं,विचारों और भावनाओं को गंभीरता से सुनना चाहिए तथा उन्हें प्रोत्साहित करते हुए उनकी प्रतिभा को सही दिशा प्रदान करनी चाहिए। यही संस्कार भविष्य में उन्हें एक जिम्मेदार,संवेदनशील और सफल नागरिक बनाते हैं। कालिका प्रसाद सेमवाल ने आचार्यों से आह्वान किया कि वे एकल अभियान की पंचमुखी शिक्षा-प्राथमिक शिक्षा,आरोग्य शिक्षा,ग्राम विकास शिक्षा,जागरण शिक्षा एवं संस्कार शिक्षा-को प्रत्येक गांव तक पहुंचाने का कार्य करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ ग्रामीण समाज को स्वास्थ्य,स्वच्छता,आत्मनिर्भरता,सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति भी जागरूक बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रत्येक गांव में एकल समिति का गठन कर अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। इस अवसर पर अंचल सचिव हरि प्रसाद मंमगाई ने कहा कि एकल अभियान केवल शिक्षा का कार्यक्रम नहीं,बल्कि ग्रामीण समाज के सर्वांगीण विकास का जनआंदोलन है। उन्होंने आचार्यों से आग्रह किया कि वे गांवों में स्वच्छता,स्वास्थ्य,पर्यावरण संरक्षण और जिले का गौरव बढ़ाने वाले महान व्यक्तित्वों के जीवन से भी ग्रामीणों को परिचित कराएं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का युवा वर्ग नशे और भोगवादी प्रवृत्तियों की ओर आकर्षित हो रहा है। ऐसे समय में शिक्षकों और समाज की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को सकारात्मक सोच,नैतिक मूल्यों और राष्ट्रहित की दिशा में प्रेरित करें। अंचल अभियान प्रमुख रश्मि ने प्रशिक्षण वर्ग की जानकारी देते हुए बताया कि उनके अंचल में कुल नौ संच संचालित हो रहे हैं तथा प्रत्येक संच में लगभग 30 आचार्य कार्यरत हैं। वर्तमान प्रशिक्षण वर्ग में 45 नवीन आचार्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं,जिन्हें शिक्षा के साथ समाज सेवा,संस्कार निर्माण और ग्राम विकास की विभिन्न गतिविधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण वर्ग में बाहर से आए अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गतिविधि प्रमुख अनूप सेमवाल,प्रशिक्षण प्रमुख रेखा जी,संच विरही की सरोजनी,संच नंदप्रयाग की आरती,प्रतिभा सहित अनेक कार्यकर्ता एवं आचार्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि एकल अभियान केवल शिक्षा का माध्यम नहीं,बल्कि संस्कारित,शिक्षित,स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का सशक्त जनआंदोलन है,जो गांव-गांव तक ज्ञान,संस्कार और सामाजिक जागरूकता का प्रकाश पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

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