हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। न्याय केवल अदालतों के निर्णय तक सीमित नहीं होता,बल्कि समय पर,सरल,सुलभ और सौहार्दपूर्ण समाधान ही न्याय व्यवस्था की वास्तविक सफलता का परिचायक है। लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और पक्षकारों को कम समय,कम खर्च तथा आपसी सहमति के आधार पर न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में सर्वोच्च न्यायालय की पहल समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत)-2026 न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय,प्रभावी और जनोन्मुख बनाने की महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। इसी उद्देश्य को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल द्वारा व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है,ताकि अधिक से अधिक पात्र पक्षकार इस अवसर का लाभ उठाकर अपने विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान कर सकें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल की सचिव एवं सिविल जज नाजिश कलीम ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 21,22 एवं 23 अगस्त 2026 को समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत)-2026 का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष लोक अदालत में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त मामलों का आपसी सहमति और सुलह के आधार पर त्वरित निस्तारण किया जाएगा,जिससे पक्षकारों को शीघ्र,सरल और प्रभावी न्याय मिल सके। उन्होंने बताया कि विशेष लोक अदालत के सफल आयोजन और अधिकाधिक मामलों के निस्तारण के उद्देश्य से मंगलवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण परिसर में संबंधित पक्षकारों के साथ छठी प्री-लोक अदालत बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित पक्षकारों को लोक अदालत की कार्यप्रणाली,उद्देश्य,प्रक्रिया और इसके विभिन्न लाभों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई तथा उन्हें सुलह के माध्यम से विवाद समाप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। सचिव नाजिश कलीम ने कहा कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था का ऐसा प्रभावी विकल्प है,जहां विवादों का समाधान बिना अनावश्यक विलंब,कम खर्च और आपसी सहमति के आधार पर किया जाता है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का भार कम होने के साथ-साथ पक्षकारों के समय,धन और मानसिक तनाव की भी बचत होती है तथा सामाजिक एवं पारिवारिक संबंधों में सौहार्द और विश्वास कायम रहता है। उन्होंने जानकारी दी कि विशेष लोक अदालत से पूर्व राज्य,जिला,तहसील एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरणों के मध्यस्थता केंद्रों में लगातार सुलह एवं प्री-लोक अदालत बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों का उद्देश्य अधिक से अधिक मामलों को आपसी समझौते के आधार पर निस्तारित कर न्याय प्रक्रिया को सरल,पारदर्शी और जनहितकारी बनाना है। उन्होंने पात्र पक्षकारों से अपील करते हुए कहा कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं और अपने विवादों का समाधान आपसी सहमति एवं संवाद के माध्यम से कराकर न्यायिक प्रक्रिया को सहज एवं प्रभावी बनाने में सहयोग दें। बैठक में डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल महेश बलूनी तथा रिटेनर अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह रावत ने भी विशेष लोक अदालत की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुलह और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का समाधान न केवल न्याय प्रक्रिया को गति देता है,बल्कि समाज में भाईचारा,आपसी विश्वास और सौहार्दपूर्ण वातावरण को भी मजबूत करता है। उन्होंने पक्षकारों से अधिकाधिक संख्या में विशेष लोक अदालत से जुड़ने और इस जनहितकारी व्यवस्था का लाभ उठाने का आह्वान किया। समाधान समारोह-2026 न्याय व्यवस्था को अधिक संवेदनशील,सरल और जनोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है,जिससे न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के साथ-साथ आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होने की उम्मीद है।