सेवानिवृत्ति बनी हरित संकल्प का पर्व-समलौण पौधारोपण से पूर्व सैनिक ने दिया प्रकृति संरक्षण का प्रेरक संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। भारतीय संस्कृति में प्रत्येक शुभ अवसर को प्रकृति से जोड़ने की परंपरा सदियों पुरानी रही है। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। भारतीय संस्कृति में प्रत्येक शुभ अवसर को प्रकृति से जोड़ने की परंपरा सदियों पुरानी रही है। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड कल्जीखाल की पट्टी पटवालस्यूं के ग्राम टुंडेड निवासी लेफ्टिनेंट कैप्टन धर्मेंद्र सिंह रावत ने सेना से सेवानिवृत्ति के अवसर को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रखते हुए उसे पर्यावरण संरक्षण के संकल्प से जोड़ दिया। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी चंपा देवी,पूर्व सैनिक पिता भोपाल सिंह रावत,सैनिक पुत्र तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर के आंगन में आम एवं संतरे के समलौण पौधे रोपकर जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को यादगार बना दिया। समलौण आंदोलन के अंतर्गत आयोजित इस प्रेरणादायी कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि जीवन के प्रत्येक शुभ अवसर पर चाहे जन्म हो,विवाह,सेवानिवृत्ति अथवा अन्य पारिवारिक समारोह को वृक्षारोपण से जोड़कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई जा सकती है। पौधों के संरक्षण का संकल्प धर्मपत्नी चंपा देवी ने लिया,जिससे यह संदेश भी गया कि पौधारोपण तभी सार्थक है जब उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी पूरी निष्ठा से निभाई जाए। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन की राज्य संयोजिका सावित्री देवी ममगांई तथा जिला संयोजक पवन पटवाल ने किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति एक-दूसरे की पूरक हैं। यदि हर परिवार अपने जीवन के प्रत्येक शुभ अवसर पर एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे,तो आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। इस अवसर पर उपस्थित पूर्व सैनिक दिगम्बर सिंह नेगी,सज्जन सिंह नेगी ग्राम मासों तथा जोगिंद्र सिंह ने समलौण संस्था की इस अभिनव पहल की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते,बल्कि जल,जंगल और जमीन के संरक्षण का आधार भी हैं। सभी ने लोगों से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने तथा विशेष रूप से वर्षा ऋतु में लगाए गए पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने जंगलों को आग से बचाने और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण में जनसहभागिता बढ़ाने की अपील भी की। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान रणवीर बिष्ट,सरपंच घनश्याम थपलियाल,पूर्व प्रधान रमेश सिंह थपलियाल सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि समलौण आंदोलन केवल पौधे लगाने का अभियान नहीं,बल्कि प्रकृति,संस्कृति और समाज को जोड़ने वाला जनआंदोलन बन चुका है,जो उत्तराखंड की भावी पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

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