हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड की लोक संस्कृति,प्रकृति संरक्षण और जनभागीदारी के प्रतीक हरेला महाभियान के अंतर्गत जनपद पौड़ी गढ़वाल में पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को एक नई दिशा देने वाली अभिनव पहल शुरू की गई है। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के दूरदर्शी निर्देशन में जिला आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग द्वारा जनपद के 34 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में औषधीय एवं सुगंधित पौधों के उद्यान विकसित किए जा रहे हैं। यह पहल केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है,बल्कि आयुर्वेद,प्रकृति संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को जन-जन तक पहुंचाने का व्यापक अभियान बनती जा रही है। हरेला महाभियान के तहत शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य औषधीय पौधों का संरक्षण,स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देना,आयुर्वेद के प्रति लोगों में जागरूकता उत्पन्न करना तथा प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर को स्वास्थ्य एवं प्रकृति शिक्षा के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करना है। जिला आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सालय द्वारा इस कार्य के लिए 1.70 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है,जिसके माध्यम से विभिन्न आरोग्य मंदिर परिसरों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों के सार्वजनिक स्थलों पर भी औषधीय पौधों का रोपण कराया जा रहा है। औषधीय उद्यानों में तुलसी,अश्वगंधा,गिलोय,ब्राह्मी,एलोवेरा,लेमनग्रास,पुदीना सहित अनेक औषधीय एवं सुगंधित पौधों को लगाया जा रहा है। ये पौधे न केवल पर्यावरण को स्वच्छ और हरित बनाने में सहायक होंगे,बल्कि प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली को भी मजबूती प्रदान करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इन पौधों की पहचान,औषधीय गुणों तथा घरेलू उपचारों में इनके उपयोग की व्यावहारिक जानकारी भी उपलब्ध होगी,जिससे आयुर्वेद के प्रति विश्वास और अपनत्व की भावना मजबूत होगी। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ.शैलेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर को केवल उपचार केंद्र नहीं,बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता और आयुर्वेदिक ज्ञान का प्रेरणा केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि औषधीय उद्यानों के माध्यम से आमजन,विशेषकर युवा पीढ़ी और विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता से परिचित कराया जाएगा। इससे लोगों में रासायनिक दवाओं पर अनावश्यक निर्भरता कम करने तथा प्राकृतिक एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि हरेला महाभियान का मूल उद्देश्य केवल वृक्षारोपण नहीं,बल्कि प्रकृति के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करना है। इसी सोच के अनुरूप औषधीय पौधों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की अमूल्य धरोहर सिद्ध होगा। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के निर्देशन में संचालित यह अभियान जनपद में पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के समन्वित मॉडल के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रशासन की यह पहल सतत विकास के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने का सशक्त उदाहरण है,जिसमें शासन,विभाग और आमजन की सहभागिता समान रूप से दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र,विद्यालय और सार्वजनिक परिसर में इस प्रकार के औषधीय उद्यान विकसित किए जाएं तो भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने,जैव विविधता के संरक्षण और आयुर्वेद आधारित जीवनशैली को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की जा सकती है। हरेला महाभियान के अंतर्गत शुरू की गई यह पहल निश्चित रूप से पौड़ी गढ़वाल को हरित,स्वस्थ और आत्मनिर्भर समाज की दिशा में आगे बढ़ाने वाला प्रेरणादायी कदम है। आने वाले वर्षों में ये औषधीय उद्यान केवल हरियाली का प्रतीक नहीं होंगे,बल्कि जनस्वास्थ्य,पर्यावरण चेतना और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के सशक्त केंद्र के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेंगे।