
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। बढ़ती आबादी और भविष्य की जल आवश्यकताओं को देखते हुए सुरक्षित एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से संचालित अमृत 2.0 योजना के माध्यम से नगर क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने,जल स्रोतों के संरक्षण तथा प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने अधिकारियों को गुणवत्ता,समयबद्धता और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। शुक्रवार को जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया की अध्यक्षता में अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत संचालित विभिन्न पेयजल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न नगर क्षेत्रों में संचालित योजनाओं की प्रगति,सर्वेक्षण,विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) निर्माण तथा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने योजनाओं के सर्वेक्षण,डीपीआर,ग्रैविटी सिस्टम,इंटेक वेल,पंप हाउस तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी लेते हुए सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अमृत 2.0 योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों के प्रत्येक घर तक नल से स्वच्छ पेयजल की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना तथा नगरों को जल-सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि दुगड्डा पंपिंग पेयजल योजना का कार्य प्रारंभ हो चुका है,जिसके पूर्ण होने पर नगर पंचायत दुगड्डा क्षेत्र में नियमित एवं सुचारु पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। स्वर्गाश्रम-जोंक पेयजल आपूर्ति योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। वहीं थलीसैंण पेयजल योजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है,जबकि सतपुली पेयजल योजना के शेष कार्यों में तेजी लाई जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि अमृत 2.0 के अंतर्गत संचालित सभी पेयजल योजनाएं नगरीय क्षेत्रों के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जल स्रोतों का भू-जल वैज्ञानिकों से परीक्षण कराया जाए तथा दीर्घकालिक जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोत संरक्षण,स्रोत संवर्धन और भू-जल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाए। साथ ही जल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी और सतत पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया। पौड़ी पंपिंग पेयजल योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि योजना को आगामी 31 अगस्त तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पेयजल वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए वितरण लाइनों के समूहों (क्लस्टर) का वैज्ञानिक आधार पर पुनर्गठन किया जाए,ताकि अंतिम छोर तक रहने वाले प्रत्येक उपभोक्ता को निर्बाध एवं समान रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने जल संस्थान एवं जल निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया कि नगर क्षेत्रों से सटे ऐसे गांव,जिन्हें अमृत 2.0 योजना से जोड़ा जा सकता है,उनके लिए आपसी समन्वय के साथ कार्ययोजना तैयार की जाए,ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ मिल सके। बैठक में अपर जिलाधिकारी एफ.आर.चौहान,अधीक्षण अभियंता मो.मिशम,प्रवीण सैनी,अधिशासी अभियंता टी.एस.रावत,सुभाष चंद्र भट्ट सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक केवल योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रही,बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा,स्रोत संरक्षण और प्रत्येक नागरिक तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए प्रशासन की गंभीर प्रतिबद्धता का भी स्पष्ट संदेश देकर संपन्न हुई।