प्रवासी पंचायत-2026 रिवर्स पलायन,स्वरोजगार और जनभागीदारी से आत्मनिर्भर उत्तराखंड की नई विकास गाथा

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की चुनौती का स्थायी समाधान अब केवल चिंता का विषय नहीं,बल्कि जनभागीदारी,स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग और स्वरोजगार आधारित विकास की नई

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की चुनौती का स्थायी समाधान अब केवल चिंता का विषय नहीं,बल्कि जनभागीदारी,स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग और स्वरोजगार आधारित विकास की नई सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में ग्राम्य विकास एवं राज्य पलायन निवारण आयोग द्वारा विकास भवन सभागार में आयोजित प्रवासी पंचायत-2026 ग्रामीण विकास,स्थानीय रोजगार,उद्यमिता और रिवर्स पलायन को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। इस संवाद में प्रवासी नागरिकों, काश्तकारों,उद्यमियों और युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए गांवों को आत्मनिर्भर,समृद्ध और रोजगारपरक बनाने के लिए अनेक सार्थक सुझाव दिए। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ.शरद सिंह नेगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले रिवर्स पलायन कर स्वरोजगार स्थापित करने वाले काश्तकारों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया और कहा कि उत्तराखंड का भविष्य गांवों की खुशहाली,स्थानीय उत्पादन,उद्यमिता और युवाओं की भागीदारी में निहित है। उन्होंने कहा कि जो लोग शहरों से वापस अपने गांव लौटकर खेती,बागवानी,पशुपालन,मधुमक्खी पालन,मशरूम उत्पादन,जैविक खेती और अन्य स्थानीय व्यवसायों को अपनाकर सफलता प्राप्त कर रहे हैं,वे पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत हैं। डॉ.नेगी ने कहा कि प्रवासी पंचायत का उद्देश्य केवल संवाद करना नहीं,बल्कि प्रवासी नागरिकों के अनुभवों और सुझावों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर गांवों के विकास की नई कार्ययोजना तैयार करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग,आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का समन्वय उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आयोग के सदस्य सचिव ए.के.राजपूत ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी जनपदों में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जा रहा है। टिहरी,चंपावत,अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में सफल आयोजन के बाद अब अन्य जनपदों में भी व्यापक स्तर पर यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग के प्रयासों से अनेक प्रवासी अपने गांव लौटकर स्वरोजगार स्थापित कर चुके हैं और दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। आयोग की सदस्य एवं गौरा देवी पुरस्कार से सम्मानित रंजना रावत नेगी ने कहा कि महिलाओं को स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण,विपणन और उद्यमिता से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण और बाज़ार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया। आयोग के सदस्य एवं पौड़ी जिला प्रभारी दिनेश रावत ने कहा कि प्रवासी नागरिकों का अनुभव,ज्ञान और संसाधन गांवों के विकास की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यदि इन्हें योजनाबद्ध तरीके से गांवों से जोड़ा जाए तो पलायन की समस्या का प्रभावी समाधान संभव है। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि सरकार स्वरोजगार एवं आजीविका संवर्धन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि होमस्टे,पारंपरिक खेती,उद्यानिकी,मत्स्य पालन,मशरूम उत्पादन और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग व आकर्षक पैकेजिंग से किसानों और उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। कार्यक्रम के दौरान रिवर्स पलायन कर सफल उद्यम स्थापित करने वाले काश्तकारों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यदि सरकार की योजनाओं,तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन सुविधाओं का समुचित लाभ मिले तो गांवों में भी सम्मानजनक रोजगार और बेहतर भविष्य तैयार किया जा सकता है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों के विपणन,सड़क,इंटरनेट,सिंचाई और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में आयोग के सदस्य सचिव रामप्रकाश पैन्यूली,पीडी डीआरडीए विवेक कुमार उपाध्याय,मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा,मुख्य कृषि अधिकारी ऋतु कुकरेती जुयाल,जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी डॉ.अल्का पांडेय,जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन भंडारी,जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र थपलियाल,परियोजना अधिकारी उरेडा चंद्रप्रकाश उपाध्याय,ग्रामोत्थान परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट,एडीपीआरओ प्रदीप सुंदरियाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी,प्रवासी काश्तकार,उद्यमी और बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि सरकार,प्रवासी नागरिक,किसान,उद्यमी और युवा एक साझा मंच पर मिलकर कार्य करें तो उत्तराखंड के गांव न केवल पलायन मुक्त बन सकते हैं,बल्कि आत्मनिर्भर,समृद्ध और रोजगार के नए केंद्र के रूप में भी स्थापित हो सकते हैं।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...