हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। नई शिक्षा व्यवस्था को भारतीय संस्कृति,ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय के साथ नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन,उसकी समीक्षा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में 31 जुलाई एवं 1 अगस्त को अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 का भव्य दो दिवसीय आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन शिक्षा,शोध,भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में व्यापक विमर्श का सशक्त मंच बनेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण आयोजन की सभी तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए विभिन्न समितियों का गठन कर जिम्मेदारियां निर्धारित कर दी गई हैं। आयोजन के प्रथम दिवस 31 जुलाई को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं भारतीय भाषाओं का समावेश विषय पर विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह द्वारा चौरास परिसर स्थित हिमालयी पुरातत्व एवं नृवंशीय संग्रहालय (म्यूजियम) में किया जाएगा। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक संकायाध्यक्ष एवं एनईपी समन्वयक प्रो.प्रशांत कण्डारी ने आयोजन समिति की बैठक में कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा करते हुए बताया कि यह केवल विश्वविद्यालय तक सीमित कार्यक्रम नहीं है,बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित करने वाला जनोपयोगी आयोजन है। उन्होंने कहा कि सम्मानित नागरिक,शिक्षाविद,शोधार्थी,विद्यार्थी,अभिभावक,विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में रुचि रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस कार्यक्रम में भाग लेकर भारतीय शिक्षा व्यवस्था के नए आयामों से परिचित हो सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य भारतीय संस्कृति,परंपरा,स्थानीय भाषाओं,कौशल विकास,अनुसंधान और नवाचार को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बनाना है। विश्वविद्यालय इस समागम के माध्यम से भारतीय ज्ञान प्रणाली के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ शिक्षकों,विद्यार्थियों,शोधकर्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सकारात्मक एवं सार्थक संवाद स्थापित करना चाहता है। समागम के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विविध आयामों,भारतीय भाषाओं के महत्व,पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान,नवाचार आधारित शिक्षा,शोध संस्कृति तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह आयोजन नई शिक्षा नीति की अवधारणा को व्यवहारिक धरातल पर समझने और समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बैठक में आयोजन समिति के सदस्य डॉ.राकेश नेगी,डॉ.नागेन्द्र रावत,डॉ.सुभाष,डॉ.अनूप सेमवाल,डॉ.कपिल पंवार,डॉ.अमरजीत परिहार,डॉ.चन्द्रशेखर जोशी,डॉ.पुनीत वालिया,डॉ.शंकर सिंह,डॉ.भास्करन सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन को सफल बनाने के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जनपद सहित आसपास के क्षेत्रों के शिक्षकों,विद्यार्थियों,अभिभावकों,शोधार्थियों,शिक्षाविदों एवं आम नागरिकों से इस राष्ट्रीय शिक्षा समागम में सहभागिता कर भारतीय शिक्षा के नए युग के इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने का आह्वान किया है।