
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल विषय ज्ञान से ही नहीं,बल्कि प्रभावी संचार कौशल,सशक्त व्यक्तित्व,सकारात्मक सोच और समय के सुनियोजित प्रबंधन से भी सुनिश्चित होती है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ.भीमराव अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र एवं सिविल सेवा निःशुल्क कोचिंग योजना के संयुक्त तत्वावधान में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए दो विशेष प्रेरणादायी व्याख्यान आयोजित किए गए। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रभावी तरीके बताए,बल्कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आवश्यक व्यवहारिक और व्यक्तित्व संबंधी गुणों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र के समन्वयक प्रो.एम.एम.सेमवाल ने अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के साथ किया। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं है,बल्कि प्रभावी व्यक्तित्व,आत्मविश्वास,नेतृत्व क्षमता और उत्कृष्ट संवाद कौशल ही युवाओं को नई पहचान दिलाते हैं। प्रथम सत्र में आधुनिक यूरोपीय एवं विदेशी भाषा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ.आरुषी उनियाल ने संचार कौशल एवं व्यक्तित्व विकास विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावी संवाद किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी शक्ति है और यह केवल बोलने तक सीमित नहीं,बल्कि स्पष्ट विचार,संवेदनशीलता,उचित भाषा,आत्मविश्वास और दूसरों को समझने की क्षमता का समन्वय है। उन्होंने संचार के सात प्रमुख सिद्धांत-स्पष्टता,संक्षिप्तता,ठोसता,शुद्धता,सुसंगतता,पूर्णता और विनम्रता को सफलता की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों को इन्हें व्यवहार में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समूह चर्चा,शब्दावली विकास,प्रस्तुतीकरण कौशल,शारीरिक हाव-भाव,सक्रिय श्रवण क्षमता तथा आत्मविश्वास को व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण आयाम बताते हुए अनेक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए।संवादात्मक शैली में आयोजित इस सत्र में विद्यार्थियों ने खुलकर प्रश्न पूछे,जिनका डॉ.उनियाल ने सहज और प्रेरक ढंग से समाधान किया। द्वितीय सत्र में दृष्टिबाधित संस्थान,चंडीगढ़ के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य जे.एस.जयाडा ने जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण का महत्व एवं समय प्रबंधन विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता परिस्थितियों से नहीं,बल्कि व्यक्ति की सोच,आत्मविश्वास,अनुशासन और कठिनाइयों का सामना करने के साहस से निर्धारित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से असफलताओं को निराशा नहीं,बल्कि सीख और आगे बढ़ने का अवसर मानने का आह्वान किया। अपने जीवन के अनुभवों और प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि समय का योजनाबद्ध उपयोग,लक्ष्य निर्धारण और निरंतर प्रयास ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने दैनिक कार्ययोजना बनाने,प्राथमिकताएं तय करने,अनुशासित जीवन शैली अपनाने तथा समय की अनावश्यक बर्बादी से बचने की सलाह देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समान समय मिलता है,लेकिन उसका सदुपयोग ही असाधारण उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करता है। दोनों व्याख्यानों के दौरान विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं,अध्ययन रणनीति,व्यक्तित्व विकास,लक्ष्य निर्धारण और सकारात्मक सोच से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे गए,जिनका विशेषज्ञों ने अनुभव आधारित और व्यावहारिक उत्तर देकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। समापन अवसर पर प्रो.एम.एम.सेमवाल ने दोनों वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ जीवन कौशल विकसित करने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ.आशीष बहुगुणा ने किया। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता के लिए ज्ञान के साथ प्रभावी संवाद क्षमता,सकारात्मक सोच,आत्मविश्वास,अनुशासन और समय प्रबंधन समान रूप से आवश्यक हैं। इस अवसर पर डॉ.अरुण शेखर बहुगुणा,डॉ.कुलदीप टम्टा,डॉ.प्रकाश सिंह,डॉ.मुकेश सहाय,डॉ.अरविंद रावत,डॉ.शैलेंद्र चमोला,डॉ.वीर सिंह सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में यह संकल्प दोहराया गया कि डॉ.अम्बेडकर उत्कृष्टता केंद्र एवं सिविल सेवा निःशुल्क कोचिंग योजना के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक,व्यक्तित्व एवं जीवन कौशल विकास के लिए भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायी एवं संवादात्मक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे।