
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में वर्षों से रिक्त पड़े प्रवक्ता पदों पर नियमित भर्ती की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। बुधवार को उत्तराखंड बेरोजगार संघ के उपाध्यक्ष सुरेश सिंह ने प्राविधिक शिक्षा निदेशालय श्रीनगर पहुंचकर संयुक्त निदेशक एस.के.वर्मा से मुलाकात की और छह सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए विभागीय व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बाह्य स्रोत एवं संविदा के माध्यम से कार्यरत पॉलिटेक्निक प्रवक्ताओं को लगातार सेवा विस्तार दिए जाने,संभावित समायोजन एवं नियमितीकरण की चर्चाओं पर तत्काल रोक लगाने तथा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के माध्यम से नियमित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने की मांग की। सुरेश सिंह ने कहा कि प्रदेश के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में लंबे समय से बड़ी संख्या में प्रवक्ता बाह्य स्रोत एवं संविदा व्यवस्था के माध्यम से कार्यरत हैं,जिन्हें समय-समय पर सेवा विस्तार दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि कुछ स्तरों पर इन कार्मिकों के समायोजन अथवा भविष्य में नियमितीकरण का मार्ग प्रशस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो यह वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों तकनीकी स्नातक,परास्नातक एवं बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अनेक राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में सैकड़ों नियमित पद लंबे समय से रिक्त हैं,लेकिन इन पदों को नियमित चयन प्रक्रिया से भरने के बजाय विभाग अस्थायी व्यवस्थाओं पर निर्भर है। दूसरी ओर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा पूर्व में जारी पॉलिटेक्निक प्रवक्ता भर्ती विज्ञापन से जुड़े प्रकरणों तथा शैक्षिक समकक्षता संबंधी विवादों का समाधान भी अपेक्षित गति से नहीं हो पाया है। न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में हो रही देरी से अभ्यर्थियों में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है। उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने अपने मांगपत्र में कहा कि सरकारी सेवाओं,विशेष रूप से द्वितीय श्रेणी (समूह-ख) के पदों पर नियुक्ति का एकमात्र आधार खुली,पारदर्शी,निष्पक्ष एवं प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया होनी चाहिए। यदि नियमित भर्ती के स्थान पर बाह्य स्रोत एवं संविदा नियुक्तियों को लगातार बढ़ावा देकर बाद में उनके समायोजन अथवा नियमितीकरण का प्रयास किया जाता है,तो यह संविधान में निहित समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत होगा तथा लाखों प्रतियोगी अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन माना जाएगा। सुरेश सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस गंभीर विषय पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और नियमित भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई,तो उत्तराखंड बेरोजगार संघ प्रदेशभर के बेरोजगार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में व्यापक आंदोलन शुरू करने को बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्राविधिक शिक्षा निदेशालय की होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विभाग युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप शीघ्र नियमित भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करेगा,ताकि योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके और प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को भी स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन प्राप्त हो।