सहकारिता की सुस्ती पर डीएम सख्त-कम प्रगति वाली समितियों से तलब हुआ जवाब,किसानों की आय बढ़ाने को क्लस्टर माॅडल पर जोर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों को सहकारिता के माध्यम से आय के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने सहकारी समितियों की

📘 इन्हें भी पढ़ें

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों को सहकारिता के माध्यम से आय के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने पर जोर दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सहकारी समितियां केवल ऋण और वसूली तक सीमित न रहें,बल्कि गांवों में कृषि,स्वरोजगार,विपणन और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों का मजबूत केंद्र बनें। इसी उद्देश्य को लेकर मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय सहकारी विकास समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में सहकारी समितियों की कार्यप्रगति,सहकारी देयकों की वसूली,एमपैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण,क्लस्टर आधारित कृषि गतिविधियों,किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारिता से जुड़े नए अवसर विकसित करने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से समीक्षा की गई। सहकारी देयकों की वसूली की समीक्षा के दौरान न्यूनतम प्रगति वाली समितियों की स्थिति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने संबंधित समितियों से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने समिति सचिवों से फोन पर संवाद कर कम वसूली के कारणों की जानकारी ली और स्पष्ट किया कि कार्यप्रगति में सुधार के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कम प्रगति वाली समितियों की नियमित समीक्षा करने तथा सहायक जिला निबंधक सहकारिता को लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित समिति सचिवों का वेतन रोकने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि कम प्रगति का कारण संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो संबंधित के विरुद्ध प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने जिले की एमपैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य सितंबर माह के अंत तक पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक के उपयोग से सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता,गति और सुविधा बढ़ेगी। बैठक में बताया गया कि जिले की 114 सहकारी समितियों के सामान्य सुविधा केंद्रों के माध्यम से विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिलाधिकारी ने इन केंद्रों को ग्रामीणों और किसानों के लिए अधिक उपयोगी एवं सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने विकासखंड दुगड्डा की सिद्धबाबा कृषक उत्पादन संगठन सहकारी समिति की गतिविधियों की भी समीक्षा की तथा समिति की गतिविधियों का विस्तार करते हुए लाभ बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र,पशु केंद्रों के संचालन तथा अन्न भंडारण योजना की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि सहकारिता को ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का प्रभावी माध्यम बनाया जाना जरूरी है। जिन सहकारी समितियों को बहुराज्यीय सहकारी समितियों में सदस्यता नहीं मिल पाई है,उनकी सूची कारण सहित प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को बेहतर ढंग से जोड़कर किसानों और ग्रामीणों के लिए आय के नए अवसर विकसित किए जाएं। उन्होंने कोऑपरेशन अमंग कोऑपरेटिव्स की भावना के अनुरूप विभिन्न सहकारी समितियों के बीच आपसी समन्वय और सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। बैठक में माधो सिंह भंडारी सहकारी खेती योजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को कन्वर्जेंस के माध्यम से कार्य करने के निर्देश दिए,ताकि विभिन्न योजनाओं और विभागीय प्रयासों को एक स्थान पर समेकित कर क्लस्टर मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने एकेश्वर के बनेखखाल,पाबों के ढिक्वाली तथा थलीसैंण के हस्यूड़ी में क्लस्टर आधारित फूलों के उत्पादन की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों से शुद्ध लाभ की स्थिति जानी। जिलाधिकारी ने फूल उत्पादन को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए उत्पादों में विविधता लाने तथा मूल्य संवर्द्धन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए उन्हें प्रसंस्करण,पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाए,ताकि उनके उत्पाद को बेहतर मूल्य मिल सके और वास्तविक आय में वृद्धि हो। जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में बेमौसमी सब्जियों और मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय जलवायु,उपलब्ध संसाधनों और बाजार की मांग के अनुरूप कृषि गतिविधियों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कुक्कुट वैली परियोजना के लिए एक सप्ताह के भीतर पात्र लाभार्थियों का चिन्हीकरण पूरा करने को कहा। जिलाधिकारी ने कहा कि कृषि एवं सहकारिता आधारित गतिविधियों को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ा जाना चाहिए,जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सके। बैठक में जानकारी दी गई कि जिले की सभी सहकारी समितियों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं। जिलाधिकारी ने समिति सदस्यों को सहकारिता से जुड़ी योजनाओं और गतिविधियों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सहकारी समितियों के स्तर पर माइक्रो बैंक की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सहकारी बैंक के एटीएम स्थापित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले के जिन क्षेत्रों में वर्तमान में एटीएम की सुविधा उपलब्ध नहीं है,वहां सहकारी बैंक की जिम्मेदारी निर्धारित करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने कहा कि सहकारी समितियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने विभिन्न विभागों की योजनाओं को सहकारिता से जोड़ते हुए क्लस्टर आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया,ताकि किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक बेहतर लाभ मिल सके और उनकी आय में वृद्धि हो। बैठक में सहायक जिला निबंधक सहकारिता सुमन कुमार,मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.विशाल शर्मा,जिला पूर्ति अधिकारी अरुण कुमार वर्मा,जिला उद्यान अधिकारी मनोरंजन सिंह भंडारी,नाबार्ड प्रबंधक हिमांक शर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं सहकारी समितियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में लिए गए निर्देशों से स्पष्ट है कि जिला प्रशासन सहकारिता को केवल विभागीय गतिविधि के रूप में नहीं,बल्कि किसानों की आय,ग्रामीण रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

नवीनतम समाचार – Dainik Himalya Times

नवीनतम समाचार

Loading...