
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। डिजिटल दौर में सोशल मीडिया जहां सूचनाओं और संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है,वहीं साइबर अपराधियों के लिए भी यह लोगों को ठगी और धोखाधड़ी का शिकार बनाने का आसान जरिया बनता जा रहा है। ऐसे में एक छोटी-सी लापरवाही न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है,बल्कि व्यक्ति की निजी जानकारी,प्रतिष्ठा और सुरक्षा पर भी गंभीर असर डाल सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस विभाग द्वारा युवाओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार के निर्देशन में जनपद में संचालित जनजागरूकता अभियानों की कड़ी में मंगलवार 22 सितंबर 2026 को साइबर सेल श्रीनगर एवं महिला थाना श्रीनगर की टीम द्वारा राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान श्रीनगर में साइबर जागरूकता,महिला सुरक्षा एवं नवीन आपराधिक कानूनों को लेकर विस्तृत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को वर्तमान समय में बढ़ते साइबर अपराधों की प्रकृति,उनसे बचाव के उपाय तथा किसी घटना के घटित होने पर तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान पुलिस टीम ने छात्र-छात्राओं को फेसबुक,इंस्टाग्राम,एक्स (ट्विटर),व्हाट्सऐप सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी। बताया गया कि साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कभी आकर्षक ऑफर,कभी नौकरी का झांसा,कभी बैंक खाते से संबंधित फर्जी संदेश तो कभी पुलिस अथवा किसी सरकारी एजेंसी के नाम पर डर पैदा कर लोगों से पैसे या निजी जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता है। छात्र-छात्राओं को बैंकिंग फ्रॉड,ऑनलाइन ठगी,डिजिटल अरेस्ट,फर्जी लिंक,फेक प्रोफाइल,साइबर ब्लैकमेलिंग,ओटीपी फ्रॉड,यूपीआई धोखाधड़ी सहित विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से समझाया गया। पुलिस टीम ने स्पष्ट किया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी,एटीएम/डेबिट कार्ड की जानकारी,यूपीआई पिन,पासवर्ड अथवा अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध के संबंध में विद्यार्थियों को जागरूक करते हुए बताया गया कि साइबर अपराधी पुलिस,सीबीआई,ईडी अथवा अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल या फोन के माध्यम से लोगों को डराने का प्रयास करते हैं और गिरफ्तारी का भय दिखाकर पैसे ऐंठते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल परिजनों अथवा पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी गई। पुलिस टीम ने सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने,संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने तथा अज्ञात मोबाइल नंबरों से आने वाले संदेशों और वीडियो कॉल का जवाब देने में सावधानी बरतने को कहा। साथ ही छात्र-छात्राओं को अपने सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग मजबूत रखने,मजबूत पासवर्ड एवं टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करने तथा संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल रिपोर्ट करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में महिला सुरक्षा को लेकर भी छात्र-छात्राओं को महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। महिलाओं एवं बालिकाओं को किसी भी प्रकार की परेशानी,उत्पीड़न,धमकी अथवा असुरक्षा की स्थिति में चुप न रहने और उपलब्ध हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग करने के लिए जागरूक किया गया। इसके साथ ही नवीन आपराधिक कानूनों से संबंधित आवश्यक जानकारी भी विद्यार्थियों के साथ साझा की गई,ताकि युवा अपने कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रह सकें। पुलिस टीम ने विद्यार्थियों से अपील की कि साइबर अपराध के प्रति जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो घटना को छिपाने या देर करने के बजाय तत्काल शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है। साइबर हेल्पलाइन नंबर-1930 पर संपर्क करने अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई। इसके साथ ही महिला सुरक्षा के लिए 1090,आपातकालीन सहायता के लिए डायल-112 तथा बच्चों से संबंधित किसी भी सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की जानकारी भी छात्र-छात्राओं को दी गई। कार्यक्रम के माध्यम से पुलिस टीम ने युवाओं को संदेश दिया कि तकनीक का इस्तेमाल सुविधा और विकास के लिए करें,लेकिन डिजिटल दुनिया में अपनी सुरक्षा को कभी नजरअंदाज न करें। अनजान लिंक पर एक क्लिक,किसी को साझा किया गया ओटीपी या सोशल मीडिया पर बरती गई एक छोटी-सी लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए सतर्क रहें,सुरक्षित रहें और साइबर अपराधियों को अपने आसपास भी मौका न दें। पुलिस के इस जागरूकता कार्यक्रम से छात्र-छात्राओं को साइबर अपराधों के नए तौर-तरीकों,महिला सुरक्षा तथा कानून संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को जागरूक कर उन्हें सुरक्षित एवं जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने की दिशा में प्रेरित करना रहा।