पोषण जागरूकता से संवरेगा किशोरों का भविष्य-विद्यालयों में गूंजा स्वस्थ जीवनशैली का संदेश

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड में स्वस्थ एवं जागरूक समाज की मजबूत नींव तैयार करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की ओर से विद्यालय स्तर पर पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड में स्वस्थ एवं जागरूक समाज की मजबूत नींव तैयार करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की ओर से विद्यालय स्तर पर पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के तहत राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सौडू-क्वीसू एवं राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गहड़़ में पोषण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में छात्र-छात्राओं को संतुलित आहार,पौष्टिक भोजन,व्यक्तिगत स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवनशैली के महत्व की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया। राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सौडू-क्वीसू विकास खण्ड खिर्सू में अध्यापिका सुबोध चमोली ने छात्र-छात्राओं को किशोरावस्था में पोषण की आवश्यकता और उसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था शरीर के विकास की महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा,प्रोटीन,विटामिन एवं अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ऐसे में बच्चों के भोजन में हरी सब्जियां,मौसमी फल,दालें,दूध एवं दूध से बने पदार्थ तथा अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ खान-पान केवल शरीर को ताकत देने तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका सीधा संबंध बच्चों की एकाग्रता,पढ़ाई,शारीरिक विकास और कार्यक्षमता से भी है। यदि बचपन और किशोरावस्था से ही बच्चों को सही पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी आदतों की जानकारी दी जाए तो वे आगे चलकर स्वस्थ एवं जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने भी पोषण विषय पर उत्साहपूर्वक अपने विचार रखे। अनमोल,राधिका,आयुष,अनुष्का,परिधि,निधि,भाष्कर एवं अमन ने पौष्टिक आहार के महत्व पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए संतुलित भोजन के साथ स्वच्छता,पर्याप्त पानी का सेवन तथा नियमित शारीरिक गतिविधियां भी जरूरी हैं। आरकेएसके काउंसलर मनमोहन सिंह ने किशोर-किशोरियों के समग्र विकास में पोषण की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पोषण की कमी का प्रभाव बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनकी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को पौष्टिक भोजन ग्रहण करने,पर्याप्त मात्रा में पानी पीने,व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने तथा नियमित एवं संतुलित दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किशोरों में स्वास्थ्य एवं पोषण को लेकर जागरूकता पैदा करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विद्यालयों के माध्यम से यदि बच्चों को सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो वे न केवल स्वयं स्वस्थ आदतें अपना सकते हैं,बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूक कर सकते हैं। वहीं राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गहड़ के शिक्षक जसपाल गुसाईं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए। बच्चों को पढ़ाई के साथ स्वास्थ्य,स्वच्छता,पोषण और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी देना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र की आधारशिला हैं। इसलिए पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों को विद्यालय स्तर पर निरंतर संचालित किया जाना चाहिए,ताकि इसका संदेश छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों और समुदाय तक भी पहुंचे। कार्यक्रम के माध्यम से छात्र-छात्राओं को सही पोषण,बेहतर स्वास्थ्य और स्वस्थ भविष्य का संदेश दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयों में किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य,पोषण,स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित विभिन्न जागरूकता गतिविधियां निरंतर संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर-किशोरियों को स्वस्थ खान-पान और जीवनशैली के प्रति जागरूक कर उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त बनाना रहा। जागरूकता कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि पोषण केवल भोजन का विषय नहीं,बल्कि स्वस्थ जीवन और उज्ज्वल भविष्य की पहली सीढ़ी है।

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